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गौरक्षा के नाम पर हो रही सियासत तब सुर्खियों में आ गई, जब महावीर जयंती के मौके पर पहुंचे मोहन भागवत ने मंच से जनसंबोधन के दौरान गौ हत्या पर रोक लगाने के लिए कानून लाने की मांग कर दी। भागवत के इस बयान ने नए विवाद को जन्म दे दिया है । उन्होंने कहा कि कानून का पालन करते हुए गौरक्षा का काम चलते रहना चाहिए। हाल ही में गौरक्षा के नाम पर दादरी और अलवर जैसी घटना ने मानवता को शर्मशार कर दिया हैं। जहां राजस्थान के अलवर जिले में गौरक्षक से जुड़ी एक भीड़ ने गौरक्षा के नाम पर पहलू खां नाम के एक शख्स को पीट-पीटकर मार डाला। इसकी गूंज संसद में भी सुनाई पड़ी।

आज चंपारण के 100 वर्ष पूरे होने पर बिहार सरकार बिहार में दस दिन का जश्न मना रही है। आजादी के पहले ब्रिटिश शासनकाल के समय अंग्रेज किसानों से जबरदस्ती नील की खेती करवाकर औने-पौने दाम पर उसे खरीदते थे। जिसके चलते किसानों को अंग्रेजों के चंगुल से मुक्त कराने व उन्हें देश से बाहर निकाल फेंकने के लिए महात्मा गांधी ने बिहार के इसी धरती पर जनता को अहिंसा नामक हथियार थमाया था। बिहार के चंपारण से ही  महात्मा गांधी को “बापू” की उपाधि मिली थी।

एपीएन के खास शो मुद्दा में इन्हीं दो पहलुओं को लेकर चर्चा की गई कि गाय पर हो रही है सियासत, और चंपारण सत्याग्रह के 100 साल बाद क्या देश में बदला किसानों का हाल? इस चर्चा को लेकर स्वामी चक्रपाणी (हिंदू धर्मगुरु), खवाजा इफ्तिकार अहमद (मुस्लिम मामलों के जानकार), नरेंद्र सिंह राणा (नेता, बीजेपी), गोविंद पंत राजू (सलाहकार संपादक, APN), अंशु अवस्थी (प्रवक्ता, यूपी कांग्रेस), और अनुराग भदोरिया (प्रवक्ता, सपा) जैसे विशेषज्ञों ने अपने विचारों को जनता के समक्ष रखा। शो का संचालन एंकर हिमांशु दीक्षित ने किया।

खवाजा इफ्तिकार अहमद का मत है कि पीएम मोदी राष्ट्र में आए तो विकास के पहलुओं को लेकर जिसके अंतर्गत सबका साथ सबका विकास आता है।यह बात पीएम ने कही भी थी  कि धर्म, जाति के नाम पर किसी के साथ भेदभाव नहीं किया जाएगा लेकिन उनकी कही गई बातें धरातल पर दिखाई नहीं दे रही हैं। आज बीजेपी, कांग्रेस, सपा, बसपा व आजम खां जैसे लोग ध्रुवीकरण के लिए लोगों के बीच में राजनीति कर रहे हैं।

अनुराग भदोरिया का मत है कि जो लोग आज गौरक्षा के नाम पर कनून बनाने की बातें कर रहे हैं वहीं गौरक्षा के नाम पर कानून का उल्लंघन भी कर रहे हैं। रही बात किसानों कि तो किसानों को आज उनके फसल तक की लागत नहीं मिल पा रही है। सरकार किसानों से गेहूं 7-8 रुपए में लेकर 70-80 रुपए में बाजार में बेच रही है। 

अंशु अवस्थी ने बीजेपी पर तंज कसते हुए कहा कि आज गाय हमारी संवेदना और आस्था का विषय है लेकिन उसके लिए हम कानून की अवहेलना नहीं कर सकते। बीजेपी शर्म करें उन्होंने राजनीति के लिए कभी मंदिर तो कभी गाय को मुद्दा बनाया है।

स्वामी चक्रपाणी ने बाबा रामदेव पर कटाक्ष किया कि ”गाय के नाम पर कहीं लोग राजनीति तो कही व्यवसाय कर रहे हैं।” और आज इसे राजनीति व व्यवसाय दोनों में उतार दिया गया है।

नरेंद्र सिंह राणा ने 17 नवंबर 1967 की घटना को याद दिलाते हुए कहा कि उस दौरान करपात्री जी महाराज से इंदिरा गांधी ने आर्शिवाद लेते हुए कहा था कि वह गौ हत्या पर प्रतिबंध लगाएगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ। सरकार आज इसी प्रतिबंध को लेकर कार्य कर रही है। उन्होंने आज के समय में किसानों की हालत पर कहा कि कृषि विकास का आधार है। जिसके लिए सरकार ने यूपी में किसानों के ऋण को माफ कर दिया है।

गोविंद पंत राजू का मत है कि वर्तमान समय में गौरक्षा के नाम पर निर्दोष लोगों को मौत के घाट उतार दिया जाता है और सरकार इस हत्या पर क्षोभ जता रही है तो यह दुखत स्थिति है। हमें इस सोच के प्रति अपने अंदर बदलाव लाने की जरुरत है। रही बात चंपारण कि तो आज 100 साल बाद किसान आजाद तो हो गए लेकिन उनकी बदहाली आज भी खत्म नहीं हुई हैं।

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