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यूपी में मतदान का आज सातवां और अंतिम दौर है और आज के बाद से ही चुनावी नतीजों की उल्टी गिनती के साथ ही नेताओं की बेचैनी नतीजों को लेकर बढ़ जाएगी। इस पूरे चुनाव के दौरान कोई किसी से कम नहीं रहा। यूपी में सात चरण के चुनावी क्षेत्र में कुल 700 चुनावी प्रचार हुए हैं। मतलब अगल अलग पार्टिंयों ने 100 रैलियां की हैं। जहां अकेले पीएम मोदी ने 23, मायावती ने 52, राहुल ने 45 और अखिलेश ने 221 जन सभाएं संबोधित  कीं।

इस बार यह चुनाव अखिलेश के लिए बेहद खास है क्योंकि 2012 के चुनाव में जहां सपा ने 224 सीटें, बीएसपी ने 80 सीटें, बीजेपी ने 47 सीटें, कांग्रेस ने 37 सीटें और अन्य पार्टिंयो ने 15 सीटों पर अपना स्थान काबिज किया था। तो इस बार यह देखना रोचक होगा कि जनता किसे सत्ता पर बैठाती है और किसे सत्ता से हटाती है।

आज एपीएन के स्टूडियो में इन्हीं दो खास मुद्दे पर चर्चा की गई, जिनमें जगदेव सिंह (प्रवक्ता, सपा), गोविन्द पंत राजू (सलाहकार संपादक, एपीएन), सुरेंद्र राजपूत (प्रवक्ता, यूपी कांग्रेस) और अश्विन उपाध्याय (प्रवक्ता, यूपी बीजेपी) बतौर गेस्ट शामिल रहें। खास शो मुद्दे का संचालन एंकर अभिलाषा ने किया।

गोविन्द पंत राजू ने कहा कि सांतवे और अंतिम चरण का चुनाव सभी पार्टिंयों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। अंतिम चुनाव में मतदाताओं ने अपने हुकुम के इक्के को नहीं खोला है। आज भी वोटरों ने घुमाकर जवाब दिया है कि जो विकास करेगा हमने उसी को वोट देंगे। जिससे एक बात स्पष्ट है कि राजनीति पार्टियां मतदाताओं के मन को टटोलने में असफल रही।

वहीं पिछली बार के अनुसार इसबार का मुद्दा कोई खास नहीं रहा केवल जुमलेबाजी दिखी है। रही बात मुलायम सिंह की तो आजमगढ़ की रैली में न जाना सपा के लिए घातक सिद्ध हो सकता है।

अश्विन उपाध्याय ने कहा कि बीजेपी की लहर यूपी में केवल अंतिम चरण में नहीं बल्कि प्रथम चरण से दिखाई दे रही थी। जनता इस पांच सालों में भ्रष्ट्राचार, भू माफिया, गुंडाराज, गरीबी और सपा के संचालित थानों से परेशान थी। उन्होने सीएम अखिलेश पर तंज कसते हुए बताया कि कल लखनऊ में हुए आतंकी एनकाउंटर में सीएम ने पुलिस टीम को शाबाशी देना उचित नहीं समझा। सपा विकास की नहीं बल्कि विनाश की राजनीति करती है। इसीलिए यूपी के एक ठग और देश के एक ठग ने मिलकर ठगबंधन बना लिया है।

सुरेंद्र राजपूत ने बीजेपी प्रवक्ता पर तंज कसा कि शायद इन्हे पता नहीं है कि सरकार और प्रशासन मिलकर काम कर रही है और कल सीएम ने डीजीपी जावीद अहमद को अपने आवास पर बुलाकर शाबाशी दी। आतंक और आतंकवादियों का कोई धर्म नहीं होता, बीजेपी के लोग केवल दिल्ली से बैठकर यूपी की राजनीति करना चाहते हैं। पीएम मोदी अपने संसदीय क्षेत्र में 3 दिन रुके या 30 दिन कोई फर्क नहीं पड़ता लेकिन इस हालात में देश को दो पीएम चाहिए एक जो विकास की बाते करे और दूसरा चुनाव में जुमलेबाजी।

जगदेव सिंह  ने कहा कि यह देश और जनता की एकता का सवाल है, देश और प्रदेश की सुरक्षा के लिए बीजेपी नेता इस स्तर तक गिर जाएंगे कि उन्होंने कानपुर रेल हादसे को कानून प्रशासन से जोड़ दिया। बीजेपी नेता केवल वोट के लिए धर्म, जाति की राजनीति करना जानते हैं। जिसके लिए वह चुनाव के दौरान मंदिर, मस्जिद दिवाली और रमजान की बाते करते हैं। साथ ही मायावती पर कटाक्ष की कि उन्होंने केवल जनता की मेहनत की कमाई को विकास के नाम पर ईंट, पत्थर में लगा दिया है।

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