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मध्यप्रदेश के किसान आंदोलन का आज सातवां दिन है और स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लेकर किसान अहिंसा से हिंसा का रास्ता अपना चुका हैं। शुक्रवार को मध्य प्रदेश में किसान आंदोलन के दौरान 4 जगहों से हिंसा की खबरें सामने आई, हालात को काबू में करने के लिए आरएएफ की 2 और टुकड़ियां भोपाल-इंदौर हाइवे पर भेजी गई जहां आरएएफ के जवानों ने प्रदर्शनकारियों को खदेड़ते हुए आंसू गैस के गोले छोड़े। वहीं, शाजापुर में गुरुवार को आगजनी और पथराव करने वाले 125 लोगों के खिलाफ भी केस दर्ज हुआ हैं, जिनमें से नामजद 25 लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया है।

उधर, मध्य प्रदेश के कृषि मंत्री और नेताओं के बेतुके बयान इस हिंसा में “आग में घी डालने” का काम कर रहे हैं। राज्य के कृषि मंत्री गौरी शंकर बिसेन ने किसानों की कर्ज माफी को लेकर कहा,’इसका कोई स्थान नहीं बनता, राज्य सरकार ने किसी भी किसान से ब्याज नहीं लिया तो कर्ज माफी कैसी।‘ कृषि मंत्री बिसेन का यह बयान राज्य सरकार के लिए मुसीबत खड़ी कर सकता है। इस बीच मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भेल के दशहरा मैदान में अपना अनिश्चितकालीन उपवास शुरू कर दिया है। सीएम का कहना है कि जब तक अराजक आंदोलन का सिलसिला थम नहीं जाता, वह सिर्फ नींबू पानी पीकर उपवास करेंगे।

एपीएन न्यूज के विशेष कार्यक्रम मुद्दा में मध्यप्रदेश में अहिंसा से हिंसा का स्वरुप अपना चुका किसान आंदोलन पर राज्य मंत्री गौरी शंकर बिसेन के बयान और सीएम चौहान के अनिश्चितकालीन उपवास के मुद्दे पर चर्चा हुई। इस अहम मुद्दे पर चर्चा के लिए विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ गोविंद पंत राजू (सलाहकार संपादक एपीएन), सूरेंद्र सिंह राजपूत (प्रवक्ता कांग्रेस), पवन खटाना (किसान नेता), आनंद शाहू  (नेता बीजेपी) और अनिल दुबे (प्रवक्ता आरएलडी) शामिल थे। शो का संचालन एंकर अनंत त्यागी ने किया।

आनंद शाहू ने कहा कि किसानों को कोई परेशानी है तो वह अपनी परेशानियों को सरकार के समक्ष रखें न की अहिंसा से हिंसा का रास्ता अपनाएं। वर्तमान समय में जो वीडियो वायरल हो रहा है, इस वीडियों में साफ दिखाई और सुनाई दे रहा है कि कांग्रेस नेता किसानों को भड़काने का काम कर रहे है।

सूरेंद्र सिंह राजपूत ने कहा कि आज देश के अन्नदाता के साथ कांग्रेस पार्टी पूर्ण सहयोग से खड़ी है। कांग्रेस पार्टी केवल कर्जमाफी के साथ किसानों के हत्यारों को संवैधानिक रुप से सजा दिलाना चाहती है। चौहान सरकार द्वारा जारी बयान के अंतर्गत कहा गया,’एमपी में कृषि स्तर की 210-20 फीसदी बढ़ोत्तरी, 0 फीसदी ब्याज पर ऋण और किसानों को उचित मूल्य दिया गया है तो किसान सड़कों पर क्यों है?’ इस दौरान कांग्रेस प्रवक्ता ने केंद्र सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि अगर कॉपोरेट बैंक चौहान सरकार के अंतर्गत में नहीं हैं तो क्या मंगल ग्रह की सरकार के अंतर्गत हैं।

पवन खटाना ने कहा कि किसान पीड़ित हैं क्योंकि उनका अस्तित्व खतरे में है। सरकार बताए किसान आत्मदाह और अपने हक के लिए आंदोलन न करे तो क्या करे? सरकार किसी की भी हो सभी “एक ही थाली के चट्टे-बट्टे हैं।“ मध्यप्रदेश में कांग्रेस-भाजपा पार्टी मिली हुई हैं। जिसका प्रमाण यह है कि कुछ समय पहले कांग्रेस नेता कमलनाथ को चौहान सरकार ने आदिवासियों के जमीन को कम मूल्यों में हड़पकर दिया था।

गोविंद पंत राजू ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर पूरे भारत में किसानों की समस्या एक जैसी है। आज से बीस साल पहले जिस मूल्य पर किसान जरुरत का समान खरीदता था क्या आज उसका मूल्य वहीं हैं? क्या किसानों को बीस साल पहले जो उपज के मूल्य मिलते थे वह मूल्य आज उसे मिल रहा हैं। इस दौरान एपीएन सलाहकार संपादक ने बताया कि हाल ही महाराष्ट्र के सीएम ने ऐलान किया है कि जल्द किसानों की कर्जमाफी की जाएगी जो अब तक की सबसे बड़ी कर्जमाफी होगी।

अनिल दुबे ने कहा कि सीएम का काम उपवास न कर बिगड़ती हुई हालातों पर काबू पाने का है, किसानों के समस्याओं को समझने का है। सीएम को चाहिए कि वह किसानों के प्रतिनिधि को बुलाकर वार्ता करें और इस समस्या का हल निकालें। उन्होंने लाल बहादुर शास्त्री के बातों को याद दिलातें हुए कहा कि उपवास करने का काम किसानों का है न की सरकारों का सरकार केवल अपना काम करें।

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