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हिजबुल मुजाहिदीन चीफ सैयद सलाहुद्दीन ने पाकिस्तान के एक टीवी चैनल पर माना है कि उसने और उसके आतंकी गुट ने भारत में हमले किए हैं। उसने यह भी कहा कि कश्मीर की आजादी के लिए उसकी लड़ाई जारी रहेगी। बता दें कि नरेंद्र मोदी के अमेरिका दौरे के वक्त वॉशिंगटन ने सलाहुद्दीन को ग्लोबल टेररिस्ट डिक्लेयर किया था। सलाउद्दीन ने अपने इस बयान से पाकिस्तान सरकार की पोल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खोलने का काम किया है। अब देखना ये है कि सलाउद्दीन के इस बयान के बाद पाक सरकार का रुख अब क्या होता है।

 सोमवार 3 जुलाई को एपीएन न्यूज के खास कार्यक्रम मुद्दा में दो अहम विषयों पर चर्चा हुई। इसके पहले हिस्से में सलाउद्दीन के कबूलनामे पर चर्चा हुई। इस अहम मुद्दे पर चर्चा के लिए विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ शामिल थे। इन लोगों में गोविंद पंत राजू (सलाहकार संपादक एपीएन न्यूज), आर बी शर्मा (रक्षा विशेषज्ञ), शहजाद पूनावाला (नेता कांग्रेस), अमित पुरी (नेता बीजेपी) शामिल थे।

आर बी शर्मा ने कहा कि जो सलाउद्दीन ने कहा है वो सबको मालूम है, कोई नई बात उसने नही कही है। भारत के जो सुरक्षाबल हैं वो इस बात को पहले से ही जानते थे। इस बात से उनको कोई फर्क पड़ने वाला नही है। शायद अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की जो सरकार है उस पर कालीख पोतने का काम सलाऊद्दीन ने जरुर किया है। सरकार को देश में छिपे गद्दारों को एक-एक करके पहचानना है फिर उनको हर तरीके से मजबूर करना है और फिर उनको कानून के दायरे में लाकर कार्रवाई करनी है।

अमित पुरी ने कहा कि पाकिस्तान एक आतंकवादी देश के रुप में काम कर रहा है। आतंकवाद को आर्थिक सहायता मुहैया करा रहा है। इस सब चीजों को भारत काफी दिन से झेल रहा था। लेकिन पिछले तीन साल में भारत की सरकार ने अपनी नीति को बिल्कुल साफ किया है।

शहजाद पूनावाला ने कहा कि जहां तक बात है सैयद सलाउद्दीन की तो हिजबुल मुजाहिद्दीन के शुरुआती दिनों से ही वो उसके प्रमुख रहे हैं और उनकी आतंकवादी गतिविधियों में क्या रुख रहा है हम सबको पता है। हाल ही में उन्होने अपना जुर्म कबूल किया है। हाल ही में भारत और अमेरिका के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति ने मिलकर उसको अंतर्राष्ट्रीय आतंकवादी घोषित करने के लिए एक साझा बयान दिया था। वो बयान क्या सिर्फ पेपर पर है? अगर पेपर पर नही है तो अमेरिका से और अतंर्राष्ट्रीय समाज से भारत को इस अंतर्राष्ट्रीय आतंकवादी पर किस तरीके से कार्रवार्ई कराता है, ये उसका सबूत होगा। वरना अमेरिका कहता तो है कि वो अंतर्राष्ट्रीय आतंकवादी है पर उस पर कोई कार्रवार्ई नही होती है तो हमारी कूतनीति कितनी सफल रही वो एक सवाल बनता है।

गोविंद पंत राजू ने कहा कि पाकिस्तान पर इसका सीधा असर पड़ेगा, ये मानना बहुत दूर तक सोचना होगा। क्योंकि पाकिस्तान पहली बार अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर आतंकवाद को संरक्षण देने या आतंकवादियों को प्रशिक्षण देने भारत के खिलाफ उनको प्रयोग करने के लिए सवालों के घेरे में नही आया है। अब खुद सलाउद्दीन ने जो अपना बयान दिया है उसमें जिस तरह से ये बातें कही है कि पहले हमारी ये हैसियत नही थी कि हम कश्मीर के बाहर भारत के अंदर कुछ कर सके लेकिन अब हमारे पास ये हैसियत है। हम भारत के अंदर कहीं भी कुछ कर सकते हैं। यानि की अब ये सवाल कश्मीर की आजादी का सवाल नही है, ये सवाल सिर्फ सलाउद्दीन के बयान से ये साफ होता है कि वो वाकई में इंसानियत के खिलाफ आतंकवादी है।

गौसेवा के नाम पर घोटाला

इसके दूसरे हिस्से में गौसेवा के नाम पर अखिलेश सरकार में हुए घोटाले पर चर्चा हुई। इस अहम मुद्दे पर भी चर्चा के लिए विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ शामिल थे। इन लोगों में गोविंद पंत राजू, जगदेव सिंह (प्रवक्ता सपा), अमित पुरी व शहजाद पूनावाला शामिल थे।

मुख्यमंत्री बनने के तुरंत बाद ही योगी आदित्यनाथ का समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव की छोटी बहू अपर्णा यादव की गौशाला का दौरा करना सुर्खियों में रहा था। लेकिन अब इसी गौशाला को लेकर अपर्णा यादव कटघरे में हैं। सूचना के अधिकार के तहत निकली जानकारी के मुताबिक गौसेवा के नाम पर उत्तर प्रदेश सरकार से मिलने वाले कुल मदद का 85 फीसदी से ज्यादा इसी गौशाला की झोली में गया था और होता भी क्यों नहीं क्योंकि अपर्णा यादव के जेठ अखिलेश यादव ही तो सूबे के मुख्यमंत्री थे, जिसकी वजह से उन्हे इतनी बड़ी मात्रा में रकम सहयोग के रुप में दी गई।

जगदेव सिंह ने कहा कि वहां योगी जी भी जा चुके है। अब यह देखना पड़ेगा कि इस धन का सदुपयोग हुआ कि दुरुपयोग हुआ। जहां ज्यादा की आवश्यकता थी वहां ज्यादा दिया गया, जहां कम की आवश्यकता थी वहां कम दिया गया। बहुत सी धर्मशालाएं फर्जी कागजों पर चल रही हैं। उन गौशालाओं की जांच कराइये जो धन ले रहे है और हैं भी नही। जहां जरुरत थी वहां कार्यवाई भी की गई थी। बहुत बड़ी धर्मशाला है, कोई धन का दुरुपयोग नही किया गया। बीजेपी की सरकार में तो कई लोगों को कौड़ियों के भाव में जमीन दे दी गई।

अमित पुरी ने कहा कि यूपी में मार्च 2017 से पहले तमाम चैनल इस बात की चर्चा करते थे कि सरकार में तकरार है। लेकिन जुलाई आते-आते पता लगा कि सरकार में तकरार तो थी लेकिन अनुदान के तारों में कही कोई बेतार नही था करंट लगातार दौड़ रहा था। गौ सेवा के क्षेत्र में योगी आदित्यनाथ जी की व्यक्तिगत अभिरुचि है। वो इसे निरंतर खुद भी करते रहते हैं तो स्वाभाविक है कि इस तरह के कार्यों को अगर वो देखते हैं तो उसके नाते उन्होने उसकी प्रशंसा की।

शहजाद पूनावाला ने कहा कि मुद्दा ये नही है कि कितनी राशि अनुदान में किसको दी गई, मुद्दा ये है कि नियमानुसार दी गई या बिना नियम के दी गई? अगर नियम के खिलाफ एक रुपया भी दिया गया है तो योगी सरकार कोई समाजवाद की तो दोस्त नही है वो वहां तक जाकर उसकी प्रशंसा करती। अगर योगी आदित्यनाथ ने उसकी प्रशंसा की है तो या तो उन्होने घोटाले की प्रशंसा कि या तो उनको भी पता है अच्छा काम हुआ।

गोविंद पंत राजू ने कहा कि यह गौशाला लखनऊ के नगर निगम ने अपनी जमीन पर ऐसे पशुओं के लिए बनाई गई थी, जो पशु पॉलिथिन खाकर बिमार हो रहे थे और नगर निगम ही इसका संचालन करता था। सरकार बनने के बाद अपर्णा यादव के एनजीओ को इसके संचालन करने की जिम्मेदारी दी गई। इसके सारे सर्वाधिकार उनके नाम पर स्थांतारित किये गये।

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