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सर्वोच्च न्यायालय में दाखिल याचिका पर सुनवाई और केंद्र सरकार की ओर से न्यायालय में अपना पक्ष रखने के बाद देश में तीन तलाक का मुद्दा एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। इस बड़ी बहस में मुस्लिम समुदाय का बड़ा तबका अपने-अपने तर्कों के साथ तीन तलाक की वर्तमान व्यवस्था के समर्थन में खड़ा है और केंद्र सरकार के अलावा मुसलमानों का भी एक तबका इसके विरोध में है। तीन तलाक का मुद्दा पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है और सभी की नजरें सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी हुई है। लेकिन सवाल ये उठता है कि तीन तलाक क्या सच में मुस्लिम समाज के लिए जरुरी है।

गुरुवार 18 मई को एपीएन न्यूज के खास कार्यक्रम मुद्दा में तीन तलाक के मुद्दे पर चर्चा हुई। इस अहम मुद्दे पर चर्चा के लिए विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ शामिल थे। इन लोगों में गोविंद पंत राजू (सलाहकार संपादक एपीएन न्यूज), मौलाना एजाज अजहर (मुस्लिम धर्म गुरु), नाहिद अकील (सामाजिक कार्यकर्ता), एच एस रावत ( हिन्दू धर्मगुरु), रुमैना सिद्दीकी (नेता बीजेपी), शरबत जहां फातिमा (प्रवक्ता कांग्रेस) अनूप जार्ज चौधरी ( अधिवक्ता सुप्रीम कोर्ट) शामिल थे।

गोविंद पंत राजू ने कहा कि जो मुद्दा सुप्रीम कोर्ट में है वह मुद्दा यह है कि एक बार में तीन तलाक बोलना जायज है या नही है । इस मामले की शुरुआत ही एक हिन्दू महिला के तलाक के मामले को लेकर हुई थी। यह धर्म का मामला है और बीजेपी इसको धार्मिक रुप देकर राजनीति करने की कोशिश कर रही है इसे इस रुप में नही देखा जाना चाहिए। यह दलील बिल्कुल बेमानी है क्योंकि यह दोनों के बीच का मामला नही है क्यों कि अगर ऐसा रहा होता तो बहुत से देशों में यह चीज खत्म नही हुई होती।

मौलाना एजाज अजहर ने कहा कि एक बार में तीन तलाक पर बैन लगाना चाहिए ये हमारे इस्लाम में नही हैं। तलाक की प्रकिया बहुत ही कठिन है इतना आसान नही है। कुछ लोगों ने तलाक को खेल बना दिया हैं और इससे औरतों पर जुल्म हो रहा है। बेचारी औरतें जो कमजोर हैं उन पर मर्दों के हंटर और कोड़े चल रहे हैं।

नाहिद अकील ने कहा कि मुस्लिम औरतों की शिक्षा के लिए इस मुल्क में अलग से कितना बजट दिया गया है। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने इतने सालों में औरतों के हक की बातों को अच्छे से नही रखा। जिसका खामियाजा भुगत रहे हैं।

रुमैका सिद्दीकी ने कहा कि अगर किसी चीज में किसी कानून में भलाई के लिए कोई भी बदलाव करना है तो उसे क्यों ना किया जाये? जब 22 देशों में तीन तलाक बैन है तो हमारे हिन्दुस्तान में क्यों नही हो सकता। क्या हमारा हिन्दुस्तान बाकी देशों से अलग है।

शरबत जहां ने कहा कि तीन तलाक बहुत बुरी चीज है शादी का रिश्ता बहुत ही पाकिजा रिश्ता है। इसे आप एक झटके में खत्म नही कर सकते। मामला कोर्ट में है और कोर्ट जो भी फैसला लेगा भारत का हर मुसलमान उसे मानेगा। एक पुरानी कहावत है नेपोलियन ने कहा था कि देश के नौजवानों को मुद्दे से भटकाना है तो धार्मिक मामलों में भटका दो।

अनुप जार्ज चौधरी ने कहा कि इस मामले पर संसद को कानून लाना चाहिए। हिन्दू मैरिज एक्ट है क्रिश्चन मैरिज एक्ट है ऐसा एक कानून आना चाहिए ताकि मुस्लिम महिलाओं को सुरक्षा मिलेगी।

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