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पिछले 25 सालों से चला आ रहा राम मंदिर मुद्दा एक बार फिर से चर्चा में हैं। कल सीबीआई की लखनऊ अदालत ने जहां इस मामले में लाल कृष्ण आडवाणी समेत 12 लोगों पर आरोप तय कर मुकदमा चलाने का आदेश दे दिया वहीँ आज सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने फैसला आने के दूसरे ही दिन अयोध्या का दौरा कर राजनीतिक गलियारे में हलचल पैदा कर दी है। हर तरफ उनके दौरे को लेकर चर्चा है। हर कोई अलग-अलग चश्में से देख रहा है। कोई इसे राजनीति व राम मंदिर से लेकर जोड़ रहा है तो कोई इसे आम दौरा बताते हुए सिर्फ पूजा-अर्चना का कार्यक्रम बता रहा है। वजह चाहे जो भी हो लेकिन राम मंदिर मुद्दा एक बार फिर राजनीति का केन्द्र बन गया है।

बुधवार 31 मई को एपीएन न्यूज के खास कार्यक्रम मुद्दा में योगी आदित्यनाथ के अयोध्या दौरे पर चर्चा हुई। इस अहम मुद्दे पर चर्चा के लिए विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ शामिल थे। इन लोगों में गोविंद पंत राजू (सलाहकार संपादक एपीएन न्यूज), अनिला सिंह (प्रवक्ता यूपी बीजेपी), सुबोध श्रीवास्तव (नेता कांग्रेस), स्वामी चक्रपानी (अध्यक्ष हिन्दू महासभा) व मौलाना ऐजाज अतहर (मुस्लिम धर्म गुरु) शामिल थे।

सुबोध श्रीवास्तव ने कहा कि मुख्यमंत्री होने के नाते वो प्रदेश में कहीं भी जा सकते हैं और हिन्दू होने के नाते वो दर्शन भी कर सकते हैं। लेकिन उन्हे कोई ऐसा संकेत नही देना चाहिए कि उनकी ये क्रिया किसी वर्ग के खिलाफ है या कानून के खिलाफ जा रही है। अगर वो इतनी सावधानी बरतें तो किसी को आपत्ति नही होगी अगर वो दर्शन करने जाते हैं। धर्म के आधार पर राजनीति करने का बीजेपी का जो मुद्दा है वो तो हमेशा ही रहेगा।

अनिला सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री जी ने अपने दौरे का कार्यक्रम सबको दिया हुआ है। अगर अयोध्या गये हैं तो उनको रामलला के दर्शन करने से कौन रोक सकता हैं वो मुख्यमंत्री हैं साथ ही साथ हिन्दू हैं तो अपने ईश्वर से जाकर आशीर्वाद लें ऐसे में किसी को आपत्ति होनी नही चाहिए। बहुत हास्यापद है अगर कांग्रेस ये कहे कि बीजेपी धर्म के आधार पर राजनीति करती है तो 1 फरवरी 1986 को तालें किसने खुलवाये थे। सबसे ज्यादा दंगे धर्म के आधार पर कांग्रेस ने करवाये थे।

मौलाना ऐजाज अतहर ने कहा कि मुख्यमंत्री जी के दौरे को इससे मिलाकर ना देखें। इसलिए की अदालत की कार्यवाई अलग है और उनका दौरा अलग है। अचानक कोई दौरा तो नही बन गया होगा तैयारियां पहले से रही होगीं। मुझे नही लगता है कि अचानक कोई घटना हो गई इसलिए जाना पड़ा। जहां तक बाबरी मस्जिद और राम जन्म भूमी का मसला है ये मामला तो कोर्ट के अंदर है।

गोविंद पंत राजू ने कहा कि जिस तरह से वक्त संवेदनशील है उत्तर प्रदेश में बूचड़खानों पर रोक लगी हालांकि वो रोक सुप्रीम कोर्ट के अनुपालन मे थी लेकिन उससे संदेश इस तरह से गया कि सरकार एक खास वर्ग के लोगों को परेशान करने में लगी है। हालांकि मामला अब तक अदालत में है और सरकार ने कुछ हद तक इसमें छूट भी दी है। राजनीतिक दलों की ये मंशा ही नही रहती है कि अयोध्या के विकास पर ध्यान दें। अयोध्या में मूल भूत सुविधाओं के लिए किसी राजनैतिक दल ने काम नही किया।

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