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जम्मू कश्मीर में असंतोष के लिए वहां की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने अब मीडिया पर निशाना साधा है। उन्होंने कई राष्ट्रीय न्यूज चैनलों से ऐसी बहस न दिखाने का आग्रह किया जो पूरे देश में कश्मीरियों की नकारात्मक छवि बनाती है। महबूबा मुफ्ती ने सभी से शांति बनाए रखने की अपील की और कहा कि सभी समस्याओं का हल बातचीत और अमन में है। हिंसा में किसी भी समस्या का हल नही है, उन्होंने कहा कि कश्मीर भारत का ताज है। हमें इसकी हिफाजत करनी है। लेकिन सवाल ये है कि अगर जो कुछ महबूबा मुप्ती ने कहा वो सच है तो कश्मीर में उनकी बात सुनी क्यों नही जा रही है। कश्मीर में हो रही पत्थरबाजी कब रुकेगी ?

मंगलवार 9 मई को एपीएन न्यूज के खास कार्यक्रम मुद्दा में दो अहम विषयों पर चर्चा हुई। इसके पहले हिस्से में कश्मीर में हो रही पत्थरबाजी के विषय पर चर्चा हुई। इस अहम मुद्दे पर चर्चा के लिए विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ शामिल थे। इन लोगों में गोविंद पंत राजू (सलाहकार संपादक एपीएन न्यूज), सुरेन्द्र राजपूत (प्रवक्ता यूपी कांग्रेस), रिटायर्ड कर्नल शिवदान सिंह (रक्षा विशेषज्ञ), सुशील पांडेय ( कश्मीर मामलों के जानकार) शामिल थे।

रिटायर्ड कर्नल शिवदान सिंह ने कहा कि जिस पत्थरबाजी को हथियार की तरह प्रयोग किया जा रहा है वह प्रदर्शनकारियों द्वारा एक बहुत ही सोची-समझी रणनीति के तहत किया जा रहा है। यदि इस कठिनाई को पैदा करने में पाकिस्तान का हाथ है तो हमें कश्मीर से पहले पाकिस्तान को बिल्कुल अलग करना पड़ेगा।

सुशील पंडित ने कहा कि कश्मीर को इस स्थिति में लाने का जिम्मेदार वहां की सरकार और राजनीतिक नेतृत्व है। कश्मीर की स्थिति आज ऐसी स्थिति में पहुंच गयी है कि लोगों को लगने लगा है कि इस स्थिति को 1990 से भी बदतर बता रहे हैं। सबसे बड़ी बात यह निकलकर आ रही है कि केन्द्र सरकार अभी भी इसकी तरफ ध्यान नही दे रही है।

गोविंद पंत राजू ने कहा कि पिछले दो साल से समस्या किस तरह से बढ़ी है और बीजेपी और पीडीपी किस तरह से जिम्मेदार है बहुत अच्छी तरह से कांग्रेस प्रवक्ता ने इस बारे में बहुत कुछ कहा। लेकिन वो ये भूल गये कि इसी कश्मीर से साढ़े 6 लाख कश्मीरी पंडितों को धार्मिक आधार अपना घर और रोजगार छोड़कर विस्थापित होकर मजबूत होना पड़ा था और इसी देश में इसी कश्मीर के अंदर हुआ था और उस वक्त भी कोई राजनीतिक दल थे। कश्मीर की समस्या पाकिस्तान का एक हथियार है जिसका उपयोग अलग-अलग रुपों में वो कर रहे हैं।

सुरेन्द्र राजपूत ने कहा कि बीजेपी ने उस पीडीपी के साथ समझौता किया जिस पीडीपी ने दक्षिण कश्मीर के उन सभी लोगों के साथ समझौता किया था उमर अब्दुला की सरकार के खिलाफ। वहां की क्षेत्रिय पार्टी केन्द्र की सरकार को इतना मजबूर करना चाहती है कि वो असली जड़ तक पहुंचने ही नही देना चाहती।

नरेन्द्र सिंह राणा ने कहा कि जम्मू कश्मीर के अंदर जब से देश आजाद हुआ तब से निरंतर कभी कम कभी ज्यादा ये अशांती देखने को मिलती रही है। चुनाव ही वहां की समस्या का समाधान है। वहां चुनी हुई सरकार ही इसको आगे बढ़कर खत्म करेगी जैसे पंजाब में हुआ था।

कब सुधरेगी यूपी की कानून व्यवस्था ?

उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था को बेहतर करने के लिए योगी सरकार सख्त कदम उठा रही है। ऐसे में मंडलों में अब डीआईजी स्तर के अधिकारियों के बजाय एडीजी स्तर के अधिकारी होंगे तैनात। दरअसल इसके पीछे की वजह पर गौर करें तो सामान्य प्रमोशन नहीं होने की वजह डीआईजी स्तर के अधिकारियों की कमी भी प्रदेश में है। जिसकी वजह से अब एडीजी स्तर के अधिकारियों को मंडलों में तैनात किया जा रहा है। लेकिन सवाल अब ये उठने लगा है कि क्या सरकार के इस कदम से कानून व्यवस्था में सुधार आयेगा।

इसके दूसरे हिस्से में यूपी की कानून व्यवस्था पर चर्चा हुई। इस मुद्दे पर चर्चा के लिए भी विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ शामिल थे। इन लोगों में गोविंद पंत राजू , सुरेन्द्र राजपूत , चन्द्रशेखर पांडेय ( नेता सपा) नरेन्द्र सिंह राणा शामिल थे।

नरेन्द्र सिंह राणा ने कहा कि यूपी के अंदर चुनी हुई सरकार की दो ही प्राथमिकताए होती है विकास और सुरक्षा। इन दोनों चीजों को जनता भी चाहती है और सरकार भी। यूपी की जनता की सुरक्षा को लेकर मुख्यमंत्री जी बहुत ही गम्भीर है कि कैसे कितनी जल्दी उत्तर प्रदेश के हालात सामान्य हो और उत्तर प्रदेश उत्तम प्रदेश बने। इसमें सबसे बड़ा रोड़ा था पैसा, सिफारिश और सोर्श ये तीनों चीजें जब से सरकार बनी है बिल्कुल बंद है।

चन्द्रशेखर पांडेय ने कहा कि सुरक्षा एक बड़ा मुद्दा होता है। पूरे भारत को हिला देने वाले निर्भया कांड से दो गुना निशंस कांड जालौन में कल हुआ है। जहां पर चार लोगों का रेप करके कुचल-कुचल कर हत्या कर दी गई है। मुख्य आरोपी को छोड़िए केवल निशानदेही के अलावा कोई आरोपी गिरफ्तार नही हुआ है। पूरे प्रदेश को कल्याण सिंह का वो दौर याद आ रहा है। अपराधियों को राजनीतिक संरक्षण की जो परंपरा वहां से शुरु हुई थी वो धीरे-धीरे करके घट गई थी। वो फिर से अब वापस आ रहा है।

गोविंद पंत राजू ने कहा कि एडीजी को जोन्स पर लाकर तैनाती देते तो ये कोई कानून व्यवस्था मे सुधार का कदम नही है। ये आपकी मजबूरी है क्यों कि आपके पास अधिकारी होगें ही नही आईजी स्तर के अधिकारियों की कमी होगी तो जोन्स में कहा से आप तैनात करेंगे। ये कोई कानूनी व्यवस्था में सुधार का कदम नही है। सरकार को ये दिखाना होगा कि वो कड़ा संदेश देना चाहती है कानून व्यवस्था तोड़ने वाले लोगों के खिलाफ।

सुरेन्द्र राजपूत ने कहा कि कानून व्यवस्था के आगे योगी सरकार अपने आपको इतना ज्यादा असहाय पा रही है तो वह पुलिस रिफोर्म को लागू कर दे प्रकाश सिंह कमेटी को लागू कर दे अपने आप अधिकारी जवाबदेह हो जायेंगे।

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