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देश के किसी भी कोने में साइबर ठगी होती है तो 80% मामलों में झारखंड के जामताड़ा जिले के करमाटांड़ का मोबाइल लोकेशन आता है। जिस राज्य में ठगी होती है वहां की पुलिस यहां जरूर आती है। जांच में पुलिस को ठग का लोकेशन यहीं मिलता है।  यह सब अचानक नहीं हुआ है । करमाटांड़ आज देश भर की पुलिस के रडार पर है ।

बॉलीवुड के शंहशाह अमिताभ बच्चन ने अपने चर्चित शो केबीसी में एक बार बताया था कि कैसे कुछ लोगों ने फोन पर बैंके मैनेजर बनकर उनके एटीएम से पांच लाख रुपये उड़ा लिये थे । उन्होंने कहा था कि जिस अपराधी ने बैंके मैनेजर बनकर पैसे चंपत किये हैं, उससे वे मिलना चाहते हैं । बिग बी ने इस घटना का जिक्र तब किया था जब झारखंड के देवघर का एक लड़का हॉट सीट पर उनके सामने था । यह बात सितंबर 2014  की है ।

झारखंड पुलिस ने 16 मई 2017 को साइबर क्राइम के एक मास्टर मांइड सीताराम मंडल समेत दो बदमाशों को गिरफ्तार किया तो  इस बात का खुलासा हुआ कि अमिताभ बच्चन के एकाउंट से इन्हीं लोगों ने पैसे उड़ाये थे । लेकिन झारखंड पुलिस के लिए इसमें कुछ भी नया नहीं है । इससे पहले  एक केंद्रीय मंत्री से साइबर ठगों ने करीब 1.80 लाख रुपये ठग लिये थे । जांच करने आये पार्लियामेंट स्ट्रीट नयी दिल्ली थाने के इंस्पेक्टर राजेश ने करमाटांड़ से हीं दो आरोपियों पकड़ा था । इसी तरह  केरल के एक सांसद से की गयी 1.60 लाख की ठगी के मामले में भी पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने की पुलिस ने धनंजय और पप्पू मंडल की गिरफ्तारी करमाटांड से की थी ।

इन अपराधियों के पकड़े जाने के बावजूद एटीएम पिन  बैंक खातों से जुड़ी जानकारियां पूछकर  लोगों के खातों से पैसे उड़ाने का सिलसिला थमा नहीं है ।  साइबर क्राइम के ठगों ने जज साहब को भी नहीं छोड़ा । बिहार के रोहतास के एक जज को साइबर अपराधियों ने अपना निशाना बना लिया । ठगों ने जज के भारतीय स्टेट बैंक के खाते से 20 हजार रुपये उड़ा लिये। पीड़ित जज ने इस संबंध में मॉडल थाने में शिकायत की है।  सासाराम व्यवहार न्यायालय में फास्ट ट्रैक कोर्ट नंबर-दो के जज रवींद्र मणि त्रिपाठी ने बताया कि 6 अगस्त 2018 को किसी ने खुद को एसबीआई का अधिकारी बता कर मोबाइल नंबर 8335080076 से फोन कर उन्हें एटीएम कार्ड बंद होने की जानकारी दी और पिन नंबर मांगा । उन्होंने ठग को बैंक अधिकारी मान कर अपने एटीएम कार्ड का पिन नंबर बता दिया।  इसके बाद उनके खाता से अचानक 20 हजार रुपये निकाल लिए गए । हालांकि, ठग ने एक बार फिर उनके खाते से 49 हजार रुपये निकालने की कोशिश की, लेकिन दोबारा कामयाब नहीं हो सका। इसके बाद उन्होंने तुंरत इसकी  सूचना उन्होंने एसबीआई के प्रबंधक फिर पुलिस को दी। पुलिस की जांच में फोन करनेवाले का लोकेशन झारखंड का जामताड़ा मिला है ।

दरअसल, देश के किसी भी कोने में साइबर ठगी होती है तो 80% मामलों में झारखंड के जामताड़ा जिले के करमाटांड़ का मोबाइल लोकेशन आता है। जिस राज्य में ठगी होती है वहां की पुलिस यहां जरूर आती है। जांच में पुलिस को ठग का लोकेशन यहीं मिलता है।  यह सब अचानक नहीं हुआ है । करमाटांड़ आज देश भर की पुलिस के रडार पर है ।  ऐसा इसलिए कि देश भर में लोगों के बैंक खाते से रुपये उड़ानेवाली साइबर ठगी के अधिकतर आरोपी इसी करमाटांड़ और पड़ोसी थाना क्षेत्र नारायणपुर से ताल्लुक रखते हैं । इस इलाके से हाल के समय में की गयी साइबर ठगी का पुलिस रिकॉर्ड इस बात को प्रमाणित करता है । इन दोनों थाना क्षेत्रों में साइबर क्राइम की पड़ताल के लिए दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, अंडमान-निकोबार, ओड़िशा, जम्मू कश्मीर समेत 22 राज्यों की पुलिस पहुंच चुकी है । हर दिन किसी न किसी राज्य व जिले की पुलिस यहां आरोपियों की खोज में आती है । करीब 50 से अधिक साइबर आरोपियों को विभिन्न प्रांतों की पुलिस गिरफ्तार कर अपने साथ ले जा चुकी है।

क्या है साइबर क्राइम 

इंटरनेट के जरिये  किये जाने वाले अपराध को साइबर क्राइम कहते हैं । इसके तहत बैंक खाते की जानकारी लेकर पैसे चुराना, मोबाइल से बैलेंस चोरी करना ,दूसरे के क्रेडिट या डेबिट कार्ड से ऑनलाइन खरीदारी करना , स्वंय को किसी कंपनी का प्रतिनिधि बताकर ऑनलाइन पैसे निवेश कराना , सॉफ्टवेयर की चोरी या दोषपूर्ण सॉफ्टवेयर से कंप्यूटर को हैक करना साइबर अपराध की श्रेणी में आता है ।

हालत यह है कि करमाटांड़ ब्लॉक के आसपास के डेढ़ सौ गांव ‘ठगी का नया ठिकाना’ बने हुए हैं। ब्लाक की आबादी 1.23 लाख है। इसमें एक हजार से ज्यादा युवा साइबर ठगी में शामिल हैं। ठगने के लिए सिर्फ एक स्मार्टफोन, एक साधारण मोबाइल और इंटरनेट कनेक्शन ही तो चाहिए। 12वीं से भी कम पढ़े लिखे ये युवा अपराधी इतने सलीके से बात करते हैं कि ठगी के शिकार इन्हें पहचान ही नहीं पाते। किसी भी व्यक्ति से एटीएम नंबर व पिन जानने के बाद उनके खाते से रुपये उड़ाने में इन्हें महज तीन मिनट का ही समय लगता है. इन्हें परिजनों का समर्थन भी प्राप्त है ।

बीते साल 14 जून को पुलिस ने जब पांच साइबर अपराधियों को अहिल्यापुर से गिरफ्तार किया तो उनमे से एक मनोज मंडल की मानें तो वो अपने माता पिता के दबाब में साइबर अपराध की दुनिया से जुड़ा । पुलिस हिरासत में मनोज ने बताया – मैं प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी कर रहा था। मुझे पूरा विश्वास था कि मैं सरकारी सेवक बनूंगा। लेकिन इसी बीच माता-पिता ने फोन कर कहा कि परीक्षा देने के बाद नौकरी लगेगी भी तो कितना कमाओगे। उस पैसे से  कुछ नहीं कर पाओगे । हमारे गांव के कम पढ़े लिखे लोग बढ़िया सूट-बूट पहनकर बढ़िया गाड़ी पर घूमता है। पैसा है। घर है। तुम भी उसी पेशे से क्यों नहीं जुड़ जाते। बस माता पिता और ग्रामीणों के दबाव में परीक्षाओं की तैयारी छोड़ साइबर क्राइम के पेशे में जुड़ गया ।“

मनोज करीब चार महीने पहले इस पेशे से जुड़ा था । अब जब पुलिस ने उसे दबोच लिया है तो उसे अफसोस हो रहा है कि क्यों वो अपने घरवालों की जिद के आगे झुका । मनोज मंडल के साथ गिरफ्तार चार अन्य साइबर अपराधियों में एक ऐसा अपराधी भी है जिनकी पारिवारिक आय मात्र तीन हजार रुपए प्रतिमाह है।

पुलिसने गिरफ्तार साइबर अपराधियों के पास से एक बिना नंबर की बोलेरो, एक अपाची बाइक, पांच मोबाइल फोन, एक एटीएम कार्ड, तीन फर्जी सीम कार्ड और 16 हजार रुपए नगद बरामद हुआ है। इन अपराधियों की ओर से करीब 50से अधिक लोगों के बैंक खाते से फर्जी अधिकारी बनकर उनके पासवर्ड और एटीएम नंबर लेकर उनके बैंक खाते से पैसे निकाल चुके हैं।

साइबर अपराधियों का गढ़ बन चुका करमाटांड़, जामताड़ा जिला मुख्यालय से कोई 20 किलोमीटर की दूरी पर  बसा  है । करमाटांड स्टेशन के बाहर एक पान वाले से  करमाटांड़ के बारे में पूछा, तो वह थोड़ा असहज हो गया । फिर अगल-बगल झांकते हुए धीरे से कहने लगा-‘मत पूछिये जनाब! मैं यहीं का बाशिंदा हूं । लेकिन यहां किसी को नहीं बताता कि करमाटांड़ का हूं । करमाटांड़ का नाम सुनते ही लोग शक की  नजरों से देखने लगते हैं । एक जमाना था जब प्रख्यात स्वतंत्रता सेनानी ईश्वर चंद्र विद्यासागर की कर्मभूमि होने के कारण करमाटांड का का नाम सम्मान से लिया जाता था लेकिन अब बताते शर्म आती है ।। पान दुकानवाला जब यह बातें बता रहा था तो  तो आसपास बैठे लोग हमें घूर रहे थे। उन्हें लग रहा था कि हम कहीं किसी जांच एजेंसी से तो नहीं है ।

दस साल पहले तक करमाटांड नशाखुरानी गिरोह के अडडे के रुप में कुख्यात था । गिरोह के सदस्य धनबाद रुट की ट्रेनों में लोगों को नशा खिलाकर लूटपाट करते थे । लेकिन वर्ष 2008 करमाटांड के लिए साइबर क्राइम का  प्रवेश वर्। माना जाता है । सबसे पहले स्थानीय युवाओं ने मोबाइल से बैलेंस चोरी करना शुरु किया । लोगों से सौ रुपया लेकर दो सौ , तीन सौ  रुपये तक के मोबाइल में बैलेंस दिया जाता था  । स्थिति यह थी कि अच्छे लोग भी आधी दाम पर दोगुना मोबाइल  बैलेंस या रिचार्ज  पाने की होड़ में शामिल हो गए जिससे इस कारोबार को प्रश्रय मिलता गया । 2010 के बाद  करमाटांड में अन्य राज्यों की पुलिस  पहुंचने लगी । शुरु में स्थानीय लोगों को कुछ पता नहीं चला लेकिन बाद में तमाम माजरा समझ में आ गया ।  इस अपराध में शामिल हजारों युवक अब फोन करके खुद को बैंक अधिकारी  बता एटीएम को रिन्युअल कराने अथवा वैधता  समाप्त करने की बात कह कर  पासवर्ड हासिल कर  लोगों को लाखों का चूना लगाने लगे । इनके निशाने पर प्राय: दूसरे राज्यों के लोग ही होते हैं ।

करमाटां में पैसा बरस रहा है । इसकी झलक साफ दिख जाती है । बिना मेहनत की हो रही अवैध कमाई से साइबर अपराधियों का लाइफस्टाइल ही बदल गया है । पैदल चलने वाले लोग अचानक महंगी चमचमाती गाड़ियों में घूमने लगे हैं।  ये लोग दैनिक जीवन में पानी की तरह पैसे खर्च करते हैं। इससे जहां नयी पीढ़ी गुमराह हो रही है, वहीं परिवार व समाज के लोग भी इनका समर्थन करने लगे हैं । समाज में यह मैसेज जा रहा है कि बच्चों को बेहतर पढ़ाई कराने से अच्छा है साइबर अपराधी बनाना। जितना धन आम लोग जिंदगी भर में नहीं कमा पाते साइबर ठग कुछ महीनों में ही कमा ले रहे हैं। स्थिति यह है कि कतिपय युवाओं को जब मन होता है तो बंगाल आदि से नर्तकी लाकर अड्डे पर नचाते हैं और नोटों की गड्डी उड़ाते हैं । एक बार तो एक सिने अभिनेत्री के कार्यक्रम के लिए बात फाइनल कर ली गयी थी । इसके लिए 20 लाख रुपये बतौर एडवांस तक दे दिया गया था. प्रशासन को जानकारी हुई तो अनुमति नहीं दी गयी. । इसके बाद उन लोगों का  20 लाख रुपये वापस भी नहीं हुए। इसका उन लोगों को कोई मलाल नहीं है ।

जामताड़ा की पुलिस अधीक्षक जया राय  भी मानती हैं कि करमाटांड साइबर ठगी का अड्डा बन गया है । श्रीमती राय  बताती हैं “ पांच  वर्षों से यहां पर साइबर ठगों की संख्या बढ़ी है। सबसे पहले दो लड़के दिल्ली से साइबर ठगी की ट्रेनिंग लेकर आए। फिर उन्होंने यहां के युवाओं को ट्रेनिंग दी। अब ये तीन टीमों में काम करते हैं। डाटा कलेक्टर्स को 30%, बात करके फंसाने वाले को 50% और पैसा निकालने वाली टीम को 20% कमीशन मिलता है। “

पुलिस जब कभी इन साइबर अपराधियों पर हाथ डालने की कोशिश करती है तो पूरा गांव अपराधियों के पक्ष में खड़ा हो उठता है।  अप्रैल महीने में छापामारी करने गयी पुलिस टीम पर गांववालों ने लाठी-डंडे से हमला कर करमाटांड़ थाने के एएसआइ हेरो मिंको घंटों बंधक बनाये रखा था । इस घटना से पुलिस प्रशासन सकते में आ गया था। आनन-फानन में डीएसपी के नेतृत्व में तीन थाने की पुलिस पहुंची तब ग्रामीण और अपराधी  एएसआइ हेरो मिंज को खैरबनवा नदी के किनारे छोड़ कर भाग निकले थे ।

एसपी जया राय साइबर अपराधियों के इस बढ़ते खौफ के लिए कहीं ना कहीं अपने महकमें को भी जिम्मेदार मानने से नहीं हिचकती । वह कहती हैं- वाकई साइबर अपराधियों का खौफ बढ़ा है और अब यह रोग नासूर बन गया है । इसके इलाज  में मुश्किलें तो आयेगी ही। इसके लिए बहुत हद तक पुलिस प्रशासन  भी जिम्मेदार है । वैसे हमने कार्रवाई तेज की है । 

वैसे कार्रवाई के डर से साइबर अपराधी अब सुरक्षित ठिकाना तलाशने लगे हैं.   कुछ आरोपी तो  बेंगलुरू व दिल्ली भी पलायन करने लगे हैं. स्थानीय पुलिस की कार्रवाई के भय से जालसाज अब अपराध का तरीका भी बदलने लगे हैं. सूत्रों के अनुसार, महंगी गाड़ियों का शीशा बंद कर आरोपी  लांग ड्राइव पर निकल जाते हैं. गाड़ी के अंदर से ही फोन पर शिकार को फंसाते हैं. फिर दूर के किसी एटीएम से पैसे निकाल लेते हैं. इससे पुलिस को लोकेशन निकालने व  पहचान  करने में कठिनाई होती है ।.

इन गांवों के साइबर ठग युवा रात में अपने घरों में में नहीं सोते। आसपास के जिलों या राज्यों में चले जाते हैं। ठगी में में इस्तेमाल होनेवली सिम गलत नाम और पते पर ली जाती है। ये सिम 300 रुपए में सटे हुए राज्य पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर से बेहद आसानी से मिल जाती है।

जब जामताड़ा पुलिस ने साइबर क्राइम के मास्टरमाइंड सीताराम मंडल  समेत दो बदमाशों को अरेस्ट किया तो कई खुलासे हुए । जामताड़ा पुलिस के मुताबिक सीताराम मंडल उर्फ राजकुमार मंडल और उसके साथी विकास मंडल ने ही अमिताभ को फोन कर उनके एटीएम और पिन नंबर हासिल किए थे। दोनों ने फिर अमिताभ के बैंक एकाउंट से पांच लाख रुपए उड़ा लिए थे। साइबर क्राइम की वारदात बढ़ने के बाद ये लोग पुलिस की निगरानी में लंबे समय से थे। एक इलाके में उनकी लोकेशन मिलने के बाद पुलिस ने उन्हें अरेस्ट किया। इनका जाल झारखंड से लेकर मुंबई, पुणे, कानपुर, बेंगलुरु और नोएडा तक फैला था।

जून 2015 से लगातार करमाटांड़ व नारायणपुर पुलिस की छापेमारी जारी है. अन्य राज्यों की पुलिस अब तक 52 साइबर ठगों को गिरफ्तार कर चुकी है. इसके अलावा स्थानीय स्तर पर भी जामताड़ा व अन्य जिलों की पुलिस द्वारा करीब 100 से अधिक साइबर ठगी के आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है । साइबर क्राइम मामले के आरोपी के पकड़े जाने के बाद थाने तक पैरवीकार पहुंचने लगते हैं। पैसे का प्रलोभन भी देते हैं. उन लोगों की मंशा यह रहती है कि कितना भी खर्च हो, किंतु उनका आदमी जेल नहीं जाये । स्थानीय पुलिस की ओर से भी साइबर क्राइम पर अंकुश लगाने का प्रयास किया जा रहा है । इसके लिए जामताड़ा जिला समेत करमाटांड़ व नारायणपुर थाने में तकनीकी सेल का गठन कर काम किया जा रहा है. साइबर क्राइम में जो स्थानीय स्तर व दूसरे राज्य की पुलिस द्वारा पकड़े गये अपराधी हैं, उसकी सूची तैयार की जा रही है.

झारखंड पुलिस के प्रवक्ता व एडीजी आरके मलिक  की मानें तो  उनका विभाग करमाटांड में बढ़ते साइबर अपराध को लेकर बेहद गंभी है । एडीजी मलिक  बताते हैं कि —  दूसरे राज्यों की पुलिस टीम को जो लोकल स्तर पर सहयोग चाहिए, तकनीकी सेल उसे उपलब्ध कराता है. पहले तो दूसरे राज्य से आनेवाली छापेमारी टीम की पुलिस कुछ बताना नहीं चाहती थी, किंतु अब साइबर अपराधियों का वेरिफिकेशन डाक से भी मिल जा रहा है. ऐसे चिह्नित किये जा रहे हैं जिनके पास कमाई का कोई जरिया नहीं, फिर भी आलीशान मकान बना रहे हैं या महंगी गाड़ियां खरीद रहे हैं, ऐसे लोगों की सूची तैयार करायी जा रही है। एडीजी का कहना है कि ऐसी सूची तैयार कर आयकर विभाग व सरकार को भेजी जायेगी. ।

साइबर अपराधियों पर लगाम कसने के उद्देश्य से  करमाटांड थाना क्षेत्र में ऑनलाइन शॉपिंग पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है । बिना वेरिफिकेशन के ऑनलाइन शॉपिंग के सामान की  डिलीवरी थाना क्षेत्र में नहीं होने दी  जा रही है । पुलिस जब भी छापामारी करती है ऑनलाइन शॉपिंग का  सामान भी काफी मात्रा में  बरामद होता रहा है ।

वैसे साइबर अपराधियों पर लगाम लगाने को लेकर उनका अपना अलग रोना है । वो थाने में संसाधन की कमी को लेकर परेशान हैं । करमाटांड़ थाना वर्तमान में किराये के भवन में चल रहा है ।. स्थिति ऐसी है कि थाने में जगह की कमी है. बाहर बरामदे में बैठ कर  थाने के कर्मी काम करते हैं. थाने में हाजत तक नहीं है. वहीं आवाजाही के लिए एक जर्जर जीप व टाटा 407 गाड़ी है ।

करमाटांड में सक्रिय साइबर अपराधियों में 80 फीसदी 18 से 35 साल के युवा  है । इस पर झाऱखंड साइबर सेल के पूर्व सदस्य और सइबर पीस फांउडेशन के अध्यक्ष लेफ्टिनेंट विनीत कुमार कहते है-  दुखद  है कि आरोपितों का संरक्षक बन कर उनके माता-पिता ही साथ देते हैं । आइटी एक्ट 66 सुप्रीम कोर्ट ने स्टंट डाउन कर दिया है. इसलिए थोड़ी मुश्किल हो रही है । वैसे भी साइबर कानून लचीला है, जिसका फायदा आरोपी उठा रहे हैं. इस कारण साइबर आरोपियों का मनोबल बढ़ रहा है. करमाटांड़ ही नहीं बल्कि जामताड़ा जिला व झारखंड  को साइबर अपराधियों ने कलंकित किया है ।

आर्थिक विश्लेषक राय तपन भारती की इन बातों में भी काफी दम दिखता है कि करमाटांड के युवाओं में जल्द पैसा कमाने का होड़ सवार है। यहाँ के युवकों को साइबर क्राईम का कानूनी पक्ष भी मालूम है. वो जानते है कि साइबर क्राईम में ज्यादा से ज्यादा 8 महीने का जेल है लेकिन उसके एवज में उन्हें ढेर सारा पैसा मिल रहा है तो वो जेल जाने को भी तैयार है. अगर यहाँ के युवायों को इस दल दल से निकालना है तो यहाँ पर स्किल डेवलपमेंट के कार्यक्रम के तहत इन्हे यहां पर रोजगार देना होगा ।

उदय चंद्र सिंह

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