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सरकारी विमान कंपनी एअर इंडिया की राह पर प्राइवेट विमान कंपनी जेट एयरवेज है। जेट एयरवेज की वित्तीय हालत काफी खराब हो गई है। बताया जा रहा है कि कंपनी की माली हालत इतनी खराब हो चुकी है कि अगर जल्द वित्तीय मदद न मिली तो 60 दिन बाद जेट एयरवेज हवा में दिखाई नहीं देगी। जेट एयरवेज ने अपने कर्मचारियों से साफ तौर पर कहा है कि यदि वो अपने खर्च कम करने की उपाय नहीं करती तो कंपनी के लिए 60 दिनों के बाद उड़ान भरना मुमकिन नहीं होगा। ये प्राइवेट विमान कंपनी अपनी लागत कम करने के लिए दो दिन पहले कंपनी के मैनेजमेंट ने कर्मचारियों की सैलरी घटाने का फैसला लिया था।

जेट के एक अधिकारी ने बताया कि हमें बताया गया है कि कंपनी को दो महीने के बाद चलाना असंभव है और मैनेजमेंट को सैलरी कट और दूसरे उपायों से खर्चे घटाने की जरूरत है। अगर ऐसा किया गया तभी 60 दिनों के बाद इसका कामकाज जारी रखा जा सकेगा। हम इस बात से चिंतित हैं कि कंपनी ने इतने वर्षों के दौरान हमें कभी भी इसकी जानकारी नहीं दी और अब जाकर उसने ये बात कही है। इससे मैनेजमेंट पर एंप्लॉयीज का भरोसा कम हुआ है।

कर्मचारियों की सैलरी में करीब 25 फीसदी तक की कटौती का फैसला लिया गया है। 12 लाख रुपये तक सालाना पैकेज पर 5 फीसदी सैलरी कटौती होगी। वहीं 1 करोड़ से अधिक पैकेज पर 25 फीसदी तक सैलरी कटौती की जाएगी। हालांकि, पायलटों की सैलरी में करीब 17 फीसदी कम होगी। इस खबर के बाद जेट एयरवेज के कर्मचारियों में खलबली मची हुर्इ है। सैलरी में कटौती दो साल के लिए होगी और इसे रिफंड नहीं किया जाएगा। बताया जा रहा है कि कंपनी को सालाना 500 करोड़ रुपये की बचत हो सकती है। 6 साल से कंपनी कोई विस्तार नहीं कर पाई और इससे उसकी वित्तीय स्थिति कमजोर हुई है। 2016 और 2017 तक लगातार दो साल के मुनाफे के बाद वित्त वर्ष 2018 में जेट को 767 करोड़ का घाटा हुआ था।

                                                                                                                        एपीएन ब्यूरो

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