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भारत की ओर से अपनी संप्रभुता का हवाला देकर चीन की महत्वाकांक्षी वन बेल्ट वन रोड (OBOR)  सम्मलेन के बहिष्कार के एक दिन बाद चीन ने भी संप्रभुता का मामला उठाया है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनफिंग ने ‘बेल्ट एंड रोड’  नाम से हो रहे इस सम्मलेन का उद्घाटन करते हिए कहा कि सभी देशों को एक दूसरे की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और एक दूसरे के हितों का सम्मान करना चाहिए।

दुनिया भर से आए 1,500 से अधिक लोगों को संबोधित कर रहे शी ने रेशम मार्ग की ऐतिहासिकता का जिक्र करते हुए कहा कि प्राचीन रेशम मार्ग ने विश्व के अनेक सभ्यताओं को आपस में जोड़ा। जब तक शान्ति थी तब तक इस मार्ग में आने वाले सभी देश समृद्ध हुआ करते थे। हालांकि युद्धों के दौर में रेशम मार्ग की प्रतिष्ठा धूमिल होती गई। उन्होंने आगे कहा वर्तमान समय में भी पूरे विश्व में आतंक और अशांति फैली हुई है और विश्व को शांति की जरुरत है। इस परियोजना से पूरे विश्व को लाभ होगा और शांति स्थापित होगी। हालांकि उससे पहले इस योजना के क्रियान्वयन और पूर्ण होने के लिए भी पूरे विश्व में शांतिपूर्ण और स्थिर माहौल जरुरी है।

शी ने इसे ‘सदी की परियोजना’ बताते हुए कहा कि इस परियोजना से एशिया, अफ्रीका और युरोप के अधिकतर देश आपस में जुड़ जायेंगे। उन्होंने कहा, ‘‘हमें नए तरह के अंतरराष्ट्रीय संबंध बनाने होंगे जो सभी के लिए सहयोगात्मक हो और जिसमें टकराव के बजाय मित्रता का भाव शामिल हो।”

इस सम्मलेन में संयुक्त राष्ट्र महासचिव, विश्व बैंक के अध्यक्ष, 29 देशों के राष्ट्राध्यक्षों समेत कुल 136 देशों के राजनयिक,व्यवसायी और पत्रकार भाग ले रहे है। इसमें सबसे बड़ा दल पाकिस्तान का है जिसमें प्रधानमंत्री नवाज शरीफ सहित 5 केन्द्रीय मंत्री और चरों प्रान्तों के मुख्यमंत्री भाग ले रहे हैं।

बताते चलें कि भारत ने पाक अधिकृत कश्मीर से होकर गुजरने वाले चीन-पाक आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) को लेकर अपनी संप्रभुता संबंधी चिंताओं के चलते इस फोरम का बहिष्कार किया है। हालांकि भारत के कुछ विशेषज्ञ इस सम्मलेन में हिस्सा ले रहे है। हालांकि शी ने अपने इस भाषण के दौरान भारत द्वारा सीपीईसी के विरोध या इसके बहिष्कार को लेकर कुछ नहीं कहा।

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