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5 जुलाई को कल संसद में आम बजट पेश किया जाएगा। कल पेश होने वाले बजट से ठीक पहले आज मोदी सरकार 2.0 ने संसद में आर्थिक सर्वेक्षण 2018-19 पेश किया है। आर्थिक सर्वेक्षण में देश की अर्थव्यवस्था के पिछले एक साल की तस्वीर पेश की गई, साथ ही अगले वित्त वर्ष के लिए भी नीतिगत संकेत दिए गये। आइए जानते हैं इस आर्थिक सर्वेक्षण में बड़ी बातें क्‍या रहीं।

1. आर्थिक सर्वे के अनुसार अगर भारत को वित्त वर्ष 2025 तक 5 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बनाना है तो लगातार जीडीपी में 8 फीसदी की दर से ग्रोथ हासिल करनी होगी।

2. वित्त वर्ष 2019-20 में आर्थिक वृद्धि दर सात प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है। पिछले वित्त वर्ष 2018-19 में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर पांच साल के न्यूनतम स्तर 6.8 प्रतिशत रही थी।

3. आर्थिक समीक्षा में 2018-19 में राजकोषीय घाटा बढ़कर 3.4 प्रतिशत पर पहुंच जाने का अनुमान है। अंतरिम बजट में भी राजकोषीय घाटा 3.4 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया था।

4. आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में कमी आ रही है, जिसकी वजह से इस वित्त वर्ष में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कमी आ सकती है। क्रूड की कीमतें भारत के फाइनेंशियल हालातों के लिए पॉजिटिव रहेंगी।

5. आर्थिक सर्वेक्षण में 2018-19 में खाद्यान्न उत्पादन 28.34 करोड़ टन रहने का अनुमान जताया गया है। कृषि, वानिकी और मत्स्यन में 2.9 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान जताया गया है।

6. विदेशी मुद्रा भंडार 2018-19 में 412.9 अरब डालर रहने का अनुमान। वित्त वर्ष 2018-19 में आयात 15.4 प्रतिशत जबकि निर्यात में 12.5 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान।

7. वित्त वर्ष 2019 में ग्रोथ धीमी होने का कारण NBFC में दिक्कतें रहीं है। लेकिन सर्वे में FY2020 में जीडीपी की तेज रफ्तार की उम्मीद जताई गई है। राजनीतिक स्थिरता से इकनॉमी के तेजी से आगे बढ़ने की उम्मीद है।

8. मांग बढ़ाने, रोजगार पैदा करने, एक्सपोर्ट बढ़ाने, प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए भारी निवेश ही एक विकल्प है। भारत में निवेश बढ़ने के संकेत दिख भी रहे हैं।

9. वित्त वर्ष 2020 में मांग बढ़ने से निवेश में उछाल आयेगा।

10. भारत की मॉनेटरी पॉलिसी ने महंगाई पर अच्छे से लगाम लगाई है।

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