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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने आईएलऐंडएफएस में कथित वित्तीय गड़बड़ियों को लेकर अपनी जांच के सिलसिले में कंपनी के दो पूर्व अधिकारियों को गिरफ्तार कर लिया। बता दें कि इस मामले में पहली गिरफ्तारी है। ईडी अधिकारियों के अनुसार, गिरफ्तार किए गए अधिकारियों में आईएलएंडएफएस के पूर्व संयुक्त निदेशक अरुण के. साहा और आईएलएंडएफएस ट्रांसपोर्टेशन नेटवर्क के प्रबंध निदेशक के. रामचंद शामिल हैं। इन दोनों को बुधवार देर शाम मनी लान्ड्रिंग कानून (पीएमएलए) के तहत मुंबई से हिरासत में लिया गया। दोनों को बृहस्पतिवार को मुंबई में विशेष पीएमएलए अदालत के सामने पेश किया जाएगा।

बता दें कि आईएलएंडएफएस करीब 91 हजार करोड़ रुपये के कर्ज में फंसी हुई है। इसके लिए कंपनी के अधिकारियों की मिलीभगत से बिना किसी जांच के बांटे गए अरबों रुपये के कर्ज को जिम्मेदार माना गया था, जो बाद में एनपीए (डूबे हुए कर्ज) में बदल गए।

ईडी ने पिछले साल दिसंबर में दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) की तरफ से दर्ज की गई एफआईआर के आधार पर फरवरी में मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। छह महीने में ईडी ने दो बार कंपनी के विभिन्न शीर्ष अधिकारियों के ठिकानों पर छापेमारी कर सबूत जुटाए थे।

पिछले महीने भी ईडी ने मुंबई में आईएलएंडएफएस के चार निदेशकों के बांद्रा, खार, नरीमन प्वाइंट और गोरेगांव स्थित कार्यालय और घरों की तलाशी ली थी। बाद में एजेंसी ने छापेमारी के दौरान कई अहम दस्तावेज मिलने की बात कही थी। इससे पहले, केंद्रीय जांच एजेंसी ने इस मामले में फरवरी में छापेमारी कर सबूत जुटाए थे। इस मामले में गंभीर धोखाधड़ी अपराध कार्यालय (एसएफआईओ), भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) भी जांच कर रहे हैं। एसएफआईओ ने अपने आरोप पत्र में 30 व्यक्तियों व इकाइयों को इस धोखाधड़ी में शामिल बताया था।

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