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हजारों करोड़ रुपये के घाटे से जूझ रही सरकारी दूरसंचार कंपनी BSNL और MTNL का जल्द ही विलय हो सकता है। खबरों के मुताबिक, केंद्रीय कैबिनेट की इसी महीने होने वाली बैठक में दोनों दूरसंचार कंपनियों को 4जी स्पेक्ट्रम देने पर मुहर लग सकती है।

इस पर पहले ही सॉलिसिटर जनरल से कानूनी मशविरा ले लिया गया है और मामले को प्रशासनिक इकाई के पास भेजा गया है। कैबिनेट को फैसला लेने से पहले ये क्लीयरेंस लेना जरूरी है स्पेक्ट्रम नीलामी में हिस्सा नहीं लेने के बावजूद BSNL और MTNL ने सबसे ऊंची बोली लगाई और स्पेक्ट्रम हासिल किया है। इसके बाद दूरसंचार विभाग कोष पर विलय को लेकर नोटिफिकेशन जारी करेगा दोनों कंपनियों के कोष की अदला-बदली बांड के रूप में की जाएगी।

BSNL और MTNL को 4जी स्पेक्ट्रम मुहैया कराने की पूरी लागत इस बार सरकार वहन करेगी जबकि, पहले हुए करार के तहत सरकार 50 फीसदी पूंजी लगाती और बाकी 50 फीसदी दोनों कंपनियों को लगाना होता। लेकिन BSNL और MTNL के नकदी संकट को देखते हुए सरकार पूरा खर्च उठाने को तैयार है दोनों कंपनियों को स्पेक्ट्रम आवंटन में करीब 20 हजार करोड़ रुपये की लागत आएगी।

दोनों सरकारी दूरसंचार कंपनियां भीषण नकदी संकट से जूझ रही हैं। BSNL ने अपने 1.76 लाख कर्मचारियों को अगस्त महीने का वेतन नहीं दिया है। जबकि MTNL के भी करीब 22 हजार कर्मचारी दो महीने से वेतन का इंतजार कर रहे हैं।

दोनों ही कंपनियों का सबसे ज्यादा खर्च वेतन पर ही होता है। BSNL में कुल आय का 75.06 फीसदी और MTNL में 87.15 फीसदी वेतन पर खर्च होता है। इनके मुकाबले, निजी कंपनियों को देखें तो वहां वेतन पर कुल आय का महज 2.9 से 5 फीसदी खर्च होता है।

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