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सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक ईमानदारी से किस्त चुकाने वालों को राहत देने की तैयारी में जुट चुके हैं। सरकार ने इसी हफ्ते बैंकिंग क्षेत्र में कई अहम बदलाव लाने की घोषणा की हैं। इस बारे में वित्तीय सेवा सचिव राजीव कुमार ने बताया, जरूरी सुधारों के बाद ईमानदार कर्जदार आसानी से सार्वजनिक बैंकों से कर्ज ले पाएंगे।

 

वित्तीय सेवा सचिव ने ये भी बताया, ‘सरकार द्वारा घोषित इस सुधार प्रक्रिया का प्रमुख उद्देश्य ईमानदार कर्जदारों को सम्मानित करना हैं।’ साथ ही ऐसी सुविधाएं विकसित करनी है, जिससें ईमानदार कर्जदारों को आसानी से लोन दिया जा सकें ताकि वे अपनी जरूरतों को पूरा कर सके।

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आसानी से कर्ज मुहैयां कराने के लिए 31 मार्च तक सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में 88,139 करोड़ रुपए की पूंजी जमा कराई जाएगी, जिससे जो लोग ईमानदारी से पैसा चुका सकते हैं, उन्हें कर्ज दिया जा सके। साथ ही बड़े लोन डिफॉल्टरों पर भी कड़ी निगरानी रखी जाएगी।

18 बैंकों को नकारात्मक रेटिंग

अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने सार्वजनिक क्षेत्र के 18 बैंकों को नकारात्मक रेटिंग दी हैं। क्रिसिल ने बताया, कि पुनर्पूजीकरण करने से बैंकों में पूंजी प्रवाह तो बढ़ेगा ही, साथ ही उनकी बैलेंस शीट में भी सुधार देखने को मिलेगा। साथ ही सरकार ने ये भी सुनिश्चित कर दिया है कि करोड़ रुपये से ज्यादा के कर्ज मामले में किसी भी नियम के उल्लंघन की रिपोर्ट देना अनिवार्य है।

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कुमार ने बताया, कि विभिन्न तकनीकी उपायों के अलावा जीएसटी रिटर्न से भी बैंकों को नकदी प्रवाह की काफी जानकारी मिल सकेगी। इस आधार पर भी बैंक ऋण मंजूरी के बारे में फैसला कर सकते हैं। उक्त कदमों के तहत सूक्ष्म, लघु और मझोले उद्यमों, वित्तीय समावेशन और रोजगार सृजन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

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