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स्विट्जरलैंड की सरकार के निर्देश पर विदेशी बैंकों ने भारतीयों से जुड़ा डाटा तैयार किया गया है, इसमें उन सभी खातों के लेन-देन का विवरण शामिल है जो 2018 के बाद से एक दिन के लिए भी सक्रिय रहे हों इन सूचनाओं से स्विस बैंकों के खातों में अघोषित संपत्ति रखने वालों के खिलाफ कार्रवाई में मदद मिलेगी जो जानकारी मुहैया कराई गई है। उसमें जमा, हस्तांतरण और अन्य संपत्ति में निवेश से जुड़े मामले हैं।

सूत्रों के अनुसार, खाताधारकों की लिस्ट में ज्यादतर दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों अमेरिका, ब्रिटेन, अफ्रीका और दक्षिण अमेरिकी देशों में रहने वाले भारतीय और बिजनेसमैन हैं। हालांकि, कभी पूरी तरह से गोपनीय रहे स्विस बैंकों के खातों के खिलाफ वैश्विक स्तर पर शुरू हुई मुहिम के बाद इन खातों से काफी पैसे निकाले गए। यहां तक की कई खाते बंद भी हो गए। साल 2018 में बंद कराए गए खातों की जानकारी भी स्विस सरकार ने भारत को दी है।

मिली जानकारी के मुताबिक, भारतीयों के 100 ऐसे खातें भी शामिल हैं। जिन्हें 2018 से पहले ही बंद कराया गया था। स्विस सरकार इन खातों की जानकारी भी साझा करने की प्रक्रिया में जुटी है। ये खाते ऑटो पार्ट्स, केमिकल, टेक्सटाइल, रियल एस्टेट, हीरा और स्टील प्रोडक्ट से जुड़े कारोबारियों के हैं। राजनीति से जुड़े लोगों के खातों की जानकारियों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसी साल जून में स्विस सरकार ने विदेशों बैंकों में कालाधन रखने वाले। 50 भारतीय कारोबारियों के नाम उजागर किए थे। खाताधारकों को अपना पक्ष रखने के लिए नोटिस भी भेजा गया था। इनमें ज्यादातर कोलकाता, मुंबई, गुजरात और बेंगलुरु के थे।

स्विस बैंकों में पैसा रखने के मामले में ब्रिटेन सबसे आगे है। स्विस नेशनल बैंक (SNB) की इसी साल जून में जारी रिपोर्ट के मुताबिक। 2018 में कुल जमा रकम का 26% हिस्सा ब्रिटेन के कारोबारियों का था। भारतीयों के रकम रखने में धीरे-धीरे कमी आ रही है। भारत इस समय 74वें नंबर पर है। पिछले साल भारतीयों की जमा रकम में 6% की कमी आई थी, उस वक्त रैंकिंग 73 थी। स्विस बैंकों में जमा रकम में भारतीयों का हिस्सा 0.07% है।

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