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New Delhi: मुंबई में आयोजित हुई 42 वीं सालाना आम बैठक में रिलायंस ने अपने कई बड़े फैसलों के बारे में जानकारी दी। रिलायंस की सहायक कंपनी रिलायंस जियो और माइक्रोसॉफ्ट कॉरपोरेशन ने लंबी अवधि की रणनीतिक साझेदारी की घोषणा की। इस साझेदारी के पीछे का लक्ष्य भारत की अर्थव्यवस्था और समाज के डिजिटल ट्रांसर्फोमेशन में तेजी लेकर आना है। इस साझेदारी की घोषणा करते हुए मुकेश अंबानी ने यह भी कहा कि उभरते स्टार्ट-अप को मुफ्त इंटरनेट, नेटवर्क कनेक्ट‍िविटी दी जाएगी। रिलायंस जियो इस कनेक्ट‍िविटी और क्लाउड इन्फ्रास्ट्रक्चर का पूरा खर्च उठाएगी।

जियो ने इस बारे में बताया कि इस 10 साल की साझेदारी दोनों कंपनियों की विश्व स्तरीय क्षमताओं को जोड़ती है, जिसमें कनेक्टिविटी, कंप्यूटिंग, स्टोरेज सॉल्यूशन और दूसरी तकनीकी सेवाएं शामिल हैं इससे रिलायंस के वर्तमान और नए बिजनेस का विस्तार होगा।

जियो और माइक्रोसॉफ्ट का लक्ष्य है कि वो डेटा एनालिटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, संज्ञानात्मक सेवाओं, ब्लॉक चेन और इंटरनेट ऑफ थिंग्स के इस्तेमाल को बढ़ा सके। साथ की छोटे और मध्यम उद्योगों में कंप्यूटिंग के इस्तेमाल को बढ़ावा देना ताकि वो प्रतिद्वंदता का सामना कर सके और विकास कर सकें। इसी के साथ भारत में तकनीक आधारित जीडीपी को बढ़ाना और नई जेनरेशन तकनीक को अपनाने को बढ़ावा देना है।

इस नए एग्रीमेंट के तहत जियो अपने आतंरिक कर्मचारियों को क्लाउड आधारित उत्पादकता और माइक्रोसॉफ्ट 365 के सहयोगी उपकरण उपलब्ध कराएगा और अपनी नोन नेटवर्क ऐपलिकेशन को Microsoft Azure cloud platform के साथ बदल देगा। जियो अपने बढ़ते स्टार्टअप के बीच Microsoft Azure cloud platform को अपनाने का प्रचार करेगा।

जियो भारत के अलग-अलग हिस्सों में डेटासेंटर स्थापित करेगा जिसमें नेक्सट जेनरेशन कंप्यूट, स्टोरेज और नेटवर्किंंग की क्षमताएं होंगी। जियो की इन सेवाओं की मदद करने के लिए माइक्रोसॉफ्ट इन डेटा सेंटरस में Azure platform भी लगाएगा। शुरुआत में जो दो पहले डेटासेंटर लगेंगे वो गुजरात और महाराष्ट्र में लगाए जा रहे हैं इनमें लगे आईटी उपकरण 7.5 मेगावाट तक बिजली की खपत करेंगे। 2020 तक इन्हें पूरी तरह से चालू करने का लक्ष्य रखा गया है।

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