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छोटे कर्जधारकों को सरकार जल्द ही बड़ी खुशखबरी दे सकती है। सूत्रों के मुताबिक, कॉरपोरेट मामलों का मंत्रालय आर्थिक रूप से गरीब वर्ग के लोगों को कर्ज से मुक्ति दिलाने के लिए लोन माफी की योजना बना रहा है। इसके स्वरूप को लेकर माइक्रो फाइनेंस इंडस्ट्री से बात हो रही है।

खबर है कि, ये लोन माफी व्यक्तिगत दिवालियापन से जुड़े मामलों में दी जाएगी जोकि आर्थिक रूप से गरीब लोगों को सबसे ज्यादा परेशान करती है। हालांकि, इसके लिए लाभार्थी पर कर्ज की कुल राशि 35 हजार रुपए से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। इस योजना का लाभ उठाने की एक शर्त ये भी होगी कि, एक बार लोन माफी योजना का लाभ लेने पर अगले पांच साल तक इसका फायदा नहीं उटाया जा सकेगा।

वैसे राष्ट्रीय स्तर पर इस योजना को लागू करने के लिए तीन से चार साल में सरकार पर 10 हजार करोड़ रुपए का अतिरिक्त भार पड़ेगा। कॉरपोरेट मामलों का मंत्रालय ने इसे लेकर माइक्रोफाइनेंस इंडस्ट्री से बात की है और इस घोषणा में उनकी चिंताओं का पूरा ध्यान रखा गया है।

सरकार की कोशिश योग्यता के आधार पर छोटे और मुश्किल में पड़े कर्जधारकों को राहत देना है। योग्यता की शर्तों पर माइक्रोफाइनेंस इंडस्ट्री के साथ विस्तृत चर्चा की गई है। आईबीसी प्रावधानों के तहत कॉरपोरेट डेट को लेकर पर्सनल गारंटर के बारे में निर्देश जल्द आएंगे। इसके बाद पार्टनरशिप और प्रोपराइटरशिप के बारे में दिशानिर्देश आएंगे।

आईबीसी के फ्रेश स्टार्ट के तहत कई प्रकार के प्रावधान हैं। इसके तहत लोन माफी योजना के लाभार्थी की वार्षिक औसत आय 60 हजार रुपए से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। कर्जदार के संपत्तियों की सकल वैल्यू 20 हजार रुपए से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। इसके अलावा लाभार्थी पर कर्ज की कुल राशि 35 हजार रुपए से ज्यादा ना हो लाभार्थी के पास अपना घर भी नहीं होना चाहिए।

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