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मदर डेयरी फ्रूट एंड वेजिटेबल प्राइवेट कंपनी में अब 1000 करोड़ रुपए के फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। लखनऊ के एक शख्स धर्मेंद्र प्रताप सिंह ने इसकी शिकायत की है। इस पर डिपार्टमेंट ऑफ इकॉनोमिक अफेयर्स यानी DEA ने जांच के आदेश दिए हैं। जांच मिनिस्टरी ऑफ कॉरपोरेट अफेयर्स के सचिव को सौंपी गई है।

खबर के मुताबिक डिपार्टमेंट ऑफ इकॉनोमिक अफेयर्स को मदर डेयरी के कथित घोटाले की शिकायत 15 अप्रैल को मिली। 29 अप्रैल को उसने जांच की जिम्मेदारी मिनिस्ट्री ऑफ कॉरपोरेट अफेयर्स को सौंप दी। DEA ने शिकायत को कृषि मंत्रालय के सचिव के पास भी भेजा है। अपने पत्र में शिकायतकर्ता ने डेयरी में 1000 करोड़ रुपए के घोटाले का आरोप लगाया है। शिकायतकर्ता ने सीरियस फ्रॉड इनवेस्टीगेशन ऑफिस (SFIO) से जांच कराने की मांग की है।

1- कंपनी ने 20 अगस्त से 28 अगस्त, 2018 के बीच IL&FS में 190 करोड़ रुपए का निवेश किया। ये निवेश तब किया गया, जब IL&FS कंपनी दिवालिया हो चुकी है। और कर्ज में डूबी है।

2-मदर डेयरी ने करीब 100 करोड़ रुपए से ज्यादा की रकम 15 सब्सिडियरी कंपनियों में भेजी। ये कंपनियां फर्जीवाड़ा करके बनाई गईं। बाद में उनको खत्म कर दिया गया।

3-साल 2004 से 2014 के बीच मदर डेयरी ने 180 करोड़ रुपए का दूध को-ऑपरेटिव की बजाय दूसरी प्राइवेट डेयरियों से खरीदा।

4-मदर डेयरी को सरकार ने साल 2014 से 2019 के बीच नेशनल डेयरी प्लान स्कीम के तहत 500 करोड़ रुपए का अनुदान दिया। इस पैसे से मदर डेयरी को दुग्ध उत्पादक कंपनियां बनानी थीं। मगर दूध प्राइवेट डेयरियों से खरीदा गया। और दिखाया गया कि ये दूध सरकार के निर्देश पर बनी कंपनियों से खरीदा गया है।

5-मदर डेयरी ने प्राइवेट कंपनियों को कितने पैसे का भुगतान किया। इस बारे में भी कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है।

6-फाइनेंशियल फ्रॉड करने के लिए सफारी नेशनल एक्सचेंज का इस्तेमाल किया गया। ये MDFVPL और जिग्नेश शाह की कंपनी फाइनेंशियल टेक्नोलॉजीज लिमिटेड ने मिलकर शुरू किया था।

7-मदर डेयरी पर कुल मिलाकर 1000 करोड़ रुपए से ज्यादा की वित्तीय अनियमितता का आरोप है।

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