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New Delhi: मंदी के बीच ऑटोमोबाइल सेक्टर अपने सबसे कठिन दौर से गुजर रहा है। लेकिन इस सब के बावजूद भी ऑटो कंपोनेंट इंडस्ट्री बिना प्रमुख पदों पर नौकरियों में कटौती किए बिना हालातों से निपटने का किसी तरह से प्रबंधन कर रही है। लेकिन अगर हालात ऐसे ही बने रहते हैं तो 10 लाख नौकरियों में कटौती की जाएगी, ऐसा Component Manufacturers Association of India (ACMA) से जुड़े एक अधिकारी ने कहा।

ACMA के अध्यक्ष राम वेंकटरमणि ने कहा कि ज्यादा ऑटो के पूर्जों के निर्माता इस मंदी में काम के दिनों को कम करके और श्रमिकों को वापिस लेने का प्रबंधन कर रहे हैं। नौकरियों में कटौती हो रही है लेकिन वो कम से कम है क्योंकि हम जानते हैं कि ट्रेंड वर्करस को फिर से पाना मुश्किल होता है।

उनके मुताबिक ऐसी मंदी पहले कभी नहीं हुई। प्रोडक्शन में 15 से 20 प्रतिशत की कटौती ने इस संकट जैसी स्थिति को खड़ा कर दिया है। अगर ये ट्रेंड इसी तरह से बना रहता है तो लगभग 10 लाख लोगों को नौकरी से निकाला जा सकता है। ऑटोमोटिव कांपोनेंट इंडस्ट्री का भारत के जीडीपी में 2.3 प्रतिशत का योगदान है इसके विनिर्माण जीडीपी का 25 प्रतिशत 50 लाख लोगों को रोजगार देता है।

उनके मुताबिक वाहन और पुर्जे बनाने वाले अपने कांट्रेक्ट वर्करस को कम कर रहे हैं और प्रोडक्शन को कुछ दिनों के लिए बंद कर रहे हैं ताकि वो लागत बचा सकें। चैन्नई और उसकी आसपास की जगहों में कुछ हजारों कांट्रेक्ट वर्करस ने अपनी नौकरियां गंवाई हैं। अगर अगली तिमाही में भी इंडस्ट्री में ऐसे ही हालात बने रहते हैं तो नौकरियों में और कटौती की जाएगी। लागत को कम करने के प्रयास इस हद तक किए जा रहे हैं कि ऑफिस के एसी को सुबह 8 बजे चलाया जाता है और शाम के 5 बजे बंद कर दिया जाता है। इसलिए लोगों को घर से रहकर काम करने के लिए भी कहा जा रहा है।

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