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सरकार ने जिस तरह से एसबीआई में उसके सहयोगी बैंकों का विलय किया था उसी तरह अब मोदी सरकार बैंक ऑफ बड़ौदा (BOB) में कुछ बैंकों का विलय करने जा रही है। जिसमें विजया बैंक (Vijya Bank) और देना बैंक (Dena Bank) के नाम  शामिल हैं। बैंकों के बढ़ते एनपीए को ध्यान में रखते हुए साल 2016 में सरकारी बैंकों के एकीकरण का ऐलान किया था। सरकार ने 2016 में सरकारी बैंको के एकीकरण की घोषणा की थी। इसी तरह सरकार ने पिछले साल सितंबर में बैंक ऑफ बड़ौदा (BOB) के साथ और देना बैंक और विजया बैंक के विलय की घोषणा की। जो कि 1 अप्रैल से लागू हो जाएगी।

सरकार का यह उद्देश्य है कि  भारतीय स्टेट बैंक (SBI) और आईसीआईसीआई (ICICI) बैंक के बाद तीसरा सबसे बड़ा बैंक बनाना है। इससे बड़ा बैंकिंग नेटवर्क कस्टमर्स को उपलब्ध होगा। इससे पहले सरकार ने देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक एसबीआई में उसके 5 सहयोगी बैंक और महिला बैंक का विलय किया था। मोदी सरकार ने बैंकों के बढ़ते एनपीए को ध्यान में रखते हुए साल 2016 में सरकारी बैंकों के एकीकरण का ऐलान किया था। इसके तहत सरकार की योजना बैंकों की संख्या घटाकर बड़े बैंक बनाना है।

इन बैंकों के विलय से ग्राहकों पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा । लेकिन ग्राहकों को बैंक से जुड़े कुछ काम करने पड़ सकते हैं।  खाताधारकों के पासबुक, चेकबुक और एटीएम कार्ड को लेकर कुछ बदलाव देखने को मिल सकते हैं। और सबसे खास बात यह है कि जो भी बैंक विलय हो रहे हैं उनकी ब्रांच बंद नहीं की जाएगी।

मोदी सरकार का यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पिछले कुछ समय से जिस तरह से बैंकों के एनपीए में बढ़ोतरी हो रही है उस पर अंकुश लगाना सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती है। इसीलिए सरकार ने साल 2016 में सरकारी बैंकों के एकीकरण की घोषणा की थी जिसके बाद एसबीआई में कई सारे बैंकों ने विलय किया था और अब बैंक ऑफ बड़ौदा (BOB) में जिस तरह देना बैंक और विजया बैंक का विलय हो रहा है उससे कहीं न कहीं सरकार को बढ़ते एनपीए से राहत पहुंचाएगा।

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