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बॉलीवुड के छोटे नवाब सैफ अली खान आज 48 साल के हो गए है। सैफ को एक ऐसे बहुआयामी अभिनेता के तौर पर शुमार किया जाता है जो पिछले दो दशकों से नायक, सहनायक और खलनायक के किरदार के जरिये सिने प्रेमियो को अपना दीवाना बनाये हुए है। सोलह अगस्त 1970 को दिल्ली में जन्में सैफ को अभिनय की कला विरासत में मिली। उनकी मां शर्मिला टैगोर फिल्म इंडस्ट्री की जानी मानी अभिनेत्री रही जबकि पिता नवाब पटौदी क्रिकेटर रहे हैं। घर में फिल्मी माहौल रहने के कारण उनका भी रूझान फिल्मों की ओर हो गया और वह भी अभिनेता बनने के ख्वाब देखने लगे ।

सैफ ने अपनी शिक्षा अमेरिका के मशहूर वेनचेस्टर कॉलेज से पूरी की। इसके बाद उन्होंने बतौर अभिनेता अपने सिने करियर की शुरूआत वर्ष 1992 में प्रदर्शित फिल्म ‘परपंरा’ से की। यश चोपडा के निर्देशन में बनी यह फिल्म टिकट खिड़की पर असफल साबित हुई। वर्ष 1993 में सैफ की पहचान और आशिक आवारा जैसी सफल फिल्में प्रदर्शित हुयी, हालांकि फिल्म पहचान की सफलता का श्रेय अभिनेता सुनील शेट्टी को अधिक दिया गया । फिल्म आशिक आवारा में निभाये गये चरित्र के लिए सैफ नवोदित अभिनेता के फिल्म फेयर पुरस्कार से सम्मानित किये गये।

सैफ अली खान के सिने कैरियर में वर्ष 1994 अहम साबित हुआ। इसी वर्ष उनकी ये दिल्लगी और मै खिलाड़ी तू अनाड़ी जैसी फिल्में प्रदर्शित हुई। दोनों फिल्मों में उनकी जोडी अभिनेता अक्षय कुमार के साथ काफी सराही गयी । खास तौर पर फिल्म ‘मैं खिलाडी तू अनाड़ी’ में अक्षय और सैफ ने अपनी जोडी के जरिये दर्शको का भरपूर मनोरंजन किया। इस फिल्म में उन पर फिल्माया यह गीत ” मैं खिलाड़ी तू अनाड़ी ” दर्शकों के बीच काफी लोकप्रिय हुआ था।वर्ष 1995 से 1998 तक का वक्त सैफ के सिने कैरियर के लिये बुरा साबित हुआ। इस दौरान उनकी यार गद्दार , आओ प्यार करे , दिल तेरा दीवाना , बंबई का बाबू ,एक था राजा ,तू चोर मैं सिपाही ,हमेशा , उड़ान , कीमत जैसी कई फिल्में बॉक्स आफिस पर असफल हो गयी, हालांकि इम्तिहान और सुरक्षा जैसी फिल्मों ने टिकट खिड़की पर औसत व्यापार किया। इनसे सैफ को कुछ खास फायदा नही मिला।

वर्ष 1999 सैफ के सिने करियर का अहम वर्ष साबित हुआ। इस वर्ष उनकी कच्चे धागे, हम साथ साथ है जैसी सफल फिल्में प्रदर्शित हुयी। इन फिल्मों में सैफ के अभिनय के विविध रूप देखने को मिले । फिल्म कच्चे धागे में जहां सैफ ने संजीदा अभिनय किया, वहीं ‘हम साथ साथ है’ में उन्होंने अपने चुलबुले अंदाज से दर्शको का दिल जीत लिया। वर्ष 2001 में प्रदर्शित फिल्म ‘दिल चाहता है’ सैफ अली खान के सिने करियर की अहम फिल्मों में एक है । फरहान अख्तार के निर्देशन में तीन दोस्तों की जिंदगी पर बनी इस फिल्म में उनके साथ आमिर खान और अक्षय खन्ना जैसे मंझे हुये सितारे थे,लेकिन सैफ ने अपने सशक्त अभिनय से दर्शको के साथ ही समीक्षकों का भी दिल जीतने में सफल रहे। वर्ष 2003 में प्रदर्शित फिल्म ‘कल हो ना हो’ सैफ के सिने करियर की सुपरहिट फिल्म में शुमार की जाती है। यशराज जौहर के बैनर तले बनी इस फिल्म में उनके सामने शाहरूख खान थे। इसके बावजूद सैफ अली खान दर्शकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करने में सफल रहे । फिल्म में अपने दमदार अभिनय के लिये वह सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता के फिल्म फेयर पुरस्कार से भी सम्मानित किये गये।

वर्ष 2004 में प्रदर्शित फिल्म ‘हम तुम’ सैफ अली खान के सिने करियर की सर्वाधिक महत्वपूर्ण फिल्म साबित हुयी। अपने दमदार अभिनय के लिये सैफ जहां सर्वश्रेष्ठ हास्य अभिनेता के फिल्म फेयर पुरस्कार से सम्मानित किये गये  वही उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त हुआ। वर्ष 2006 में सैफ के सिने कैरियर की एक और सुपरहिट फिल्म ‘ओमकारा’ प्रदर्शित हुयी । इस फिल्म में सैफ ने लंगड़ा त्यागी का किरदार निभाया। यूं तो यह किरदार ग्रे शेडस लिये हुये था, लेकिन इसके बावजूद वह दर्शकों की सहानुभूति प्राप्त करने में सफल रहे । फिल्म में अपने दमदार अभिनय के लिये वह सर्वश्रेष्ठ खलनायक के फिल्म फेयर पुरस्कार से भी सम्मानित किये गये । वर्ष 2009 में सैफ ने फिल्म निर्माण के क्षेत्र में भी कदम रख दिया और लव आज और कल  का निर्माण किया। वर्ष 2017 में सैफ की फिल्म रंगून और शेफ प्रदर्शित हुयी लेकिन ये फिल्में हिट सफल नहीं हो सकी। सैफ इन दिनों फिल्म बाजार में काम कर रहे हैं।

साभार-ईएनसी टाईम्स

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