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राजनीति एक ऐसी नीति जिसकी कोई नीति नहीं। यहां कई फर्श से अर्श तक पहुंचे तो कई धराशायी हो गए। बहुतों को मुक्कमल मुकाम मिला तो कई कहीं के ना रहे। कई ऐसे हैं जो सितारे बनकर चमक रहें हैं और कई ऐसे हैं जिनकी चमक हमेशा के लिए फिकी पड़ गई। यहां बहुतों ने अपनी किस्मत आज़माई।

हाल ही में सपना चौधरी एक ऐसा नाम हैं जो लगातार सुर्खियों में बनी हुई हैं। कभी कांग्रेस तो कभी बीजेपी। अभी तक अपने राजनीतिक पत्ते नहीं खोल रहीं हैं। कभी कांग्रेस के साथ फार्म भरती नज़र आती हैं तो कभी बीजेपी के नेता के साथ चाय पीती। ये पहली बार नहीं है जब फिल्मी और रंगमंच की दुनिया से लोग राजनीति में आए हैं। साल 1989 में राज बब्बर ने जनता दल का दामन थामा। फिर वो सपा में गए। पर मुलायम से मतभेद के बाद 2006 में उन्होंने कांग्रेस का दामन थाम लिया।

शत्रुघ्न सिन्हा पुराने भाजपाई माने जाते रहे हैं। पर कुछ सालों से पार्टी के प्रति उनकी नाराज़गी के चलते इस बार के लोकसभा चुनाव में उन्हें टिकट नहीं दिया गया।

जयाप्रदा ने 1994 में तेलुगु देशम पार्टी का दामन थामा।1996 में वो राज्य सभा में पहुंची। पर 2004 में वो समाजवादी पार्टी में शामिल हो गईं। और रामपुर से लोकसभा का चुनाव भी जीता।

साउथ के सुपरस्टार चिरंजीवी ने 2008 में प्रजा राज्यम पार्टी बनाई। पर 2011 में उनकी पार्टी कांग्रेस में शामिल हो गई। 2012 में यूपीए सरकार में केन्द्र में मंत्री बनें।

मनोज तिवारी भोजपुरी फिल्मों के सुपरस्टार। साल 2009 में समाजवादी पार्टी से गोरखपुर से लोकसभा चुनाव लडे पर हार गए। बाद में भीजेपी में शामिल हुए। और 2014 में दिल्ली से लोकसभा चुनाव जीते।

भोजपुरी फिल्मों के एक और स्टार रविकिशन । 2014 में कांग्रेस के टिकट पर जौनपुर से लोकसभा का चुनाव लड़ा। साल 2017 में वो बीजेपी में शामिल हो गए। लेकिन इस बार वो केवल बीजेपी का प्रचार करेंगे।

संजय दत्त बालीवुड का जानामाना नाम। साल 2009 में वो राजनिति में शामिल हुए। उन्होने समाजवादी पार्टी ज्वाइन की। लेकिन साल 2012 में वो कांग्रेस में शामिल हो गए। वहीं फिल्मी दुनिया के कुछ ऐसे चमकते स्टार भी हैं जो अब राजनिति से राजनीति से तौबा कर चुके हैं।

अमिताभ बच्चन जिन्होने साल 1984 में कांग्रेस के टिकट से इलाहाबाद से चुनाव लड़ा। और जीत हासिल की।पर कुछ साल बाद राजनिति से दूरी बना ली।

शोले के वीरु यानि धरमेंद्र ने साल 2004 में बीकानेर से चुनाव लड़ा और जीते भी लेकिन बाद में उन्होंने भी राजनिति से विदा ले ली।

गोविंदा ने साल 2009 में कांग्रेस के टिकट से मुबंई से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। पर उन्हैं भी राजनीति राजनी रास नहीं आई। बहरहाल ये वो सितारें हैं जिन्होंने फिल्मी दुनिया के साथ साथ चुनावी दुनिया में भी अपनी किस्मत आज़ामाई। कुछ को राजनिति रास आई तो कुछ को नहीं आई।

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