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नेशनल अवॉर्ड विनर अभिनेता मनोज बाजपेयी ने उनकी फिल्मों को नॉमिनेशन ना मिलने पर नाराजगी जताई है। उन्होंने इसको लेकर ट्वीटर पर अपना दर्द बयां किया है।

उन्होंने ट्वीट कर कहा वह इस बात से वाकिफ हैं कि राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बेहद प्रशंसित उनकी तमाम फिल्मों को कभी भी ‘तथाकथित बड़े मुख्यधारा के पुरस्कारों’ की नामांकन लिस्ट में जगह नहीं दी जाती है। उन्होने ये बात अपने ट्विटर अकाउंट के हवाले से कही है।

आपको बता दें कि 64वें विमल फिल्मफेयर अवार्डस 2019 के लिए मंगलवार को नामांकन सूची की घोषणा हो गई हैं जिसमें मनोज बाजपेयी की कोई फिल्म शामिल नहीं है। ट्वीट में मनोज ने फिल्म गली गुलियां का एक पोस्ट शेयर कर लिखा है।

‘अब तो आदत हो गई है ये देखने कि मेरी फिल्में राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पर सराही जाती हैं, लेकिन उन्हें तथाकथित मुख्यधारा के पुरस्कारों की लिस्ट में एक नामांकन भी नहीं मिलता, अवॉर्ड तो छोड़िए रचनात्मक खोज और शोषण अभी भी जारी है, गली गुलियां।’

बता दें कि मनोज की फिल्म ‘गली गुलियां’ (2018) को बुसान इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल और 2017 मियामी फिल्म फेस्टिवल, इंडियन फिल्म फेस्टिवल ऑफ लॉस एंजिल्स, अटलांटा फिल्म फेस्टिवल, 42वें क्लीवलैंड इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल, शिकागो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल और 2018 इंडियन फिल्म फेस्टिवल ऑफ मेलबर्न में दिखाया गया था

बता दें कि मनोज बाजपेयी को पिछली बार फिल्म ‘सोनचिरिया’ में डाकू मानसिंह के किरदार में देखा गया था। फिल्म में सुशांत सिंह राजपूत मुख्य किरदार में थे। बाकी के कलाकारों में आशुतोष राणा, रणवीर शौरी और अभिनेत्री भूमि पेडनेकर का नाम शामिल है। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर कुछ कमाल नहीं कर सकी थी।

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