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चीन की समुद्री नीति से सभी पड़ोसी मुल्क अच्छी तरह वाकिफ हैं। ऐसे में यह आवश्यक हो गया है कि सभी पड़ोसी मुल्क आपस में मिलकर चीन को एकता की शक्ति दिखाएं। इस राह में भारत एक बड़ी भूमिका निभा भी रहा है।  भारतीय नौसेना ने अंडमान निकोबार द्वीप में 16 अलग-अलग देशों की नौसेनाओं के साथ अभ्यास शुरू कर दिया है।  . ‘फ्रेंड्शिप अक्रॉस द सी’ की थीम के साथ भारतीय नौसेना ‘मिलन 2018’ नामक अभ्यास कर रही है, जो कि आठ दिनों (6 से 13 मार्च) तक चलेगा। जहां एक ओर चीन हिंद महासागर में अपना प्रभाव बढ़ाने की जुगत में लगा हुआ है, वहीं 16 देशों का यह समुद्री अभ्यास चीन को अपनी ताकत दिखाने का एक अच्छा मौका है।

क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच इस अभ्यास का आयोजन किया गया है। बता दें कि चीन अपनी समुद्री नीति को लेकर काफी सख्त रवैया अपनाता है। वह अपनी भौगोलिक मैप में कई बार बदलाव करके दूसरे देशों की सीमाओं में भी हस्तक्षेप करने लगता है। ऐसे में चीन का सामना करना किसी भी छोटे देश की बस की बात नहीं रहती। ऐसे में भारत ही एकमात्र ऐसा देश है जो सभी देशों को साथ लेते हुए, उनकी अगुवाई करते हुए चीन को चुनौती दे। भारतीय नौसेना के अधिकारियों के मुताबिक, आठ दिनों तक चलने वाले इस अभ्यास में 28 पोत हिस्सा ले रहे हैं, जिसमें 17 पोत ऑस्ट्रेलिया, बांग्लादेश, इंडोनेशिया, मलेशिया, म्यांमार, सिंगापुर, श्रीलंका और थाईलैंड के हैं। ध्यान देने वाली बात ये है कि ‘मिलन अभ्यास’ की शुरुआत वर्ष 1995 में हुई थी। और तब, सिर्फ चार देश इसमें शामिल हुए थे। तब इंडोनेशिया, सिंगापुर, श्रीलंका और थाईलैंड ने हिस्सा लिया था।

बता दें कि इस समय  मालदीव और श्रीलंका में इमरजेंसी के हालात हैं। ऐसे हालात में भारतीय नौसेना ने नौसैनिक अभ्यास की प्रक्रिया शुरू की है। इस अभ्यास को शुरु करने का मकसद, पूर्वी एशिया और दक्षिण पूर्व एशिया की नौसेनाओं के साथ दोस्ताना संबंधों को बढ़ावा देना था. लेकिन, बदलते वक्त के साथ जैसे-जैसे समंदर में भारतीय नौसेना की ताकत बढ़ी, वैसे-वैसे अन्य देशों की नौसेनाएं, समंदर में होने वाली इस मैराथन मीटिंग और अपनी ताक़त के प्रदर्शन के लिए, भारत के साथ आती चली गईं।

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