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केरल में सबरीमला स्थित अयप्पा मंदिर में 10 से 50 साल आयुवर्ग के बीच की 50 से अधिक महिलाओं के प्रवेश के राज्य सरकार के दावे के बीच उच्चतम न्यायालय ने गत दो जनवरी को मंदिर में प्रवेश करने वाली महिलाओं को सुरक्षा प्रदान करने का पुलिस को आज निर्देश दिया।

मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली तीन-सदस्यीय खंडपीठ ने दोनों महिलाओं-कनकदुर्गा (44) और बिंदु (40) को चौबीस घंटे सुरक्षा मुहैया कराने का यह कहते हुए निर्देश दिया कि इन महिलाओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी राज्य पुलिस की होगी। किसी भी अप्रिय घटना के लिये केरल पुलिस जिम्मेदार होगी।

दोनों महिलाओं ने गत गुरुवार को याचिका दायर करके सुरक्षा उपलब्ध कराने की गुहार लगायी थी। न्यायालय ने आज सुनवाई के वक्त स्पष्ट कर दिया कि वह इस मामले में केवल दोनों महिलाओं की सुरक्षा के पहलुओं पर ही विचार करेगा, अन्य किसी पहलुओं पर नहीं। पीठ ने इस मामले को सबरीमला मामले की लंबित याचिकाओं के साथ नत्थी करने से भी इन्कार कर दिया।

गौरतलब है कि उच्चतम न्यायालय ने 10-50 आयु वर्ग की महिलाओं के अयप्पा मंदिर में प्रवेश करने पर लगी रोक हटाने का ऐतिहासिक फैसला दिया था, इसके बावजूद कुछ संगठनों द्वारा न्यायालय के इस फैसले का विरोध किया जा रहा है।

आज की सुनवाई के दौरान केरल सरकार के वकील विजय हंसारिया ने खंडपीठ को अवगत कराया कि सभी उम्र की महलाओं के लिए मंदिर के दरवाजे खोलने के न्यायालय के ऐतिहासिक आदेश के बाद से 10 से 50 साल आयुवर्ग की कम से कम 51 महिलाओं ने मंदिर में प्रवेश किया है। उन्होंने बताया कि 10 से 50 वर्ष आयु वर्ग की करीब साढे सात हजार महिलाओं ने अपने आधार के जरिये सबरीमला में प्रवेश के लिए पंजीकरण कराया है।

-साभार, ईएनसी टाईम्स

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