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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2018 में खिलाड़ी बेटियों के प्रदर्शन को सराहते हुए कहा कि उनकी उपलब्धियों से प्रेरणा मिलती है। मोदी ने रेडियो पर प्रसारित अपने मासिक कार्यक्रम ‘मन की बात’ की 51वीं कड़ी में रविवार को कहा, “हर समाज में खेल-कूद का अपना महत्व होता है। जब खेल खेले जाते हैं तो देखने वालों का मन भी ऊर्जा से भर जाता है। खिलाड़ियों को नाम, पहचान, सम्मान बहुत सी चीज़ें हम अनुभव करते हैं। लेकिन, कभी-कभी इसके पीछे की बहुत-सी बातें ऐसी होती हैं जो खेल-विश्व से भी बहुत बढ़ करके होती है, बहुत बड़ी होती है।” प्रधानमंत्री ने कहा, “मैं कश्मीर की एक बेटी हिनाया निसार के बारे में बताना चाहता हूं जिसने कोरिया में कराटे चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता। हनाया 12 साल की है और कश्मीर के अनंतनाग में रहती है। हनाया ने मेहनत और लगन से कराटे का अभ्यास किया, उसकी बारीकियों को जाना और खुद को साबित करके दिखाया। मैं सभी देशवासियों की ओर से उसके उज्जवल भविष्य की कामना करता हूं। हनाया को ढ़ेर सारी शुभकामनाएँ और आशीर्वाद।”

मोदी एक युवा मुक्केबाज का जिक्र करते हुए कहा, “16 साल की एक बेटी रजनी के बारे में मीडिया में बहुत चर्चा हुई है। आपने भी जरुर पढ़ा होगा। रजनी ने जूनियर महिला मुक्केबाजी चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीता है। जैसे ही रजनी ने पदक जीता वह तुरंत पास के एक दूध के स्टाल पर गई और एक गिलास दूध पिया। इसके बाद रजनी ने अपने पदक को एक कपड़े में लपेटा और बैग में रख लिया।” उन्होंने कहा, “अब आप सोच रहे होंगे कि रजनी ने एक गिलास दूध क्यों पिया? उसने ऐसा अपने पिता जसमेर सिंह जी के सम्मान में किया, जो पानीपत के एक स्टाल  पर लस्सी बेचते हैं। रजनी ने बताया कि उनके पिता ने उसे यहां तक पहुंचाने  में बहुत त्याग किया है, बहुत कष्ट झेले हैं। जसमेर सिंह हर सुबह रजनी और उनके भाई-बहनों के उठने से पहले ही काम पर चले जाते थे। रजनी ने जब अपने पिता से बॉक्सिंग  सीखने की इच्छा जताई तो पिता ने सभी संभव साधन जुटा कर उसका हौसला बढ़ाया।”

मोदी ने कहा, “रजनी को मुक्केबाजी का अभ्यास पुराने दस्तानों के साथ शुरू करना पड़ा क्योंकि उन दिनों उनके परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। इतनी सारी बाधाओं के बाद भी रजनी ने हिम्मत नहीं हारी और मुक्केबाजी सीखती रही। उसने सर्बिया में भी एक पदक जीता। मैं रजनी को शुभकामनाएँ और आशीर्वाद देता हूं और रजनी का साथ देने और उसका उत्साह बढ़ाने के लिए उसके माता-पिता जसमेर सिंह जी और उषारानी जी को भी बधाई देता हूं।”

प्रधानमंत्री ने पुणे की 20 साल की बेटी वेदांगी कुलकर्णी का भी जिक्र किया जो इसी महीने साइकिल से दुनिया का चक्कर लगाने वाली सबसे तेज एशियाई बन गयी हैं। मोदी ने कहा, “वह 159 दिनों तक रोजाना लगभग 300 किलोमीटर साइकिल चलाती थी। आप कल्पना कर सकते हैं -प्रतिदिन 300 किलोमीटर साइक्लिंग! साइकिल चलाने के प्रति उनका जुनून वाकई सराहनीय है।” मोदी ने कहा, “क्या इस तरह की उपलब्धियों, ऐसी सिद्धि के बारे में सुनकर हमें प्रेरणा नहीं मिलती। ख़ासकर के मेरे युवा मित्रों, जब ऐसी घटनाएँ सुनते हैं तब हम भी कठिनाइयों के बीच कुछ कर गुजरने की प्रेरणा पाते हैं। अगर संकल्प में सामर्थ्य है, हौसले बुलंद हैं तो रुकावटें खुद ही रुक जाती हैं। कठिनाइयाँ कभी रुकावट नही बन सकती हैं। अनेक ऐसे उदाहरण जब सुनते हैं तो हमें भी अपने जीवन में प्रतिपल एक नयी प्रेरणा मिलती है।”

प्रधानमंत्री ने अंडर-19 क्रिकेट विश्व कप और ब्लाइंड  क्रिकेट विश्व कप में भारत की जीत का भी जिक्र किया और साथ ही जकार्ता एशियाई खेलों और पैरा एशियाई खेलों में भी भारत के प्रदर्शन को सराहा जहां भारत ने बड़ी संख्या में मेडल जीते।

-साभार, ईएनसी टाईम्स

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