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आरएसएस का कार्यक्रम जारी है और वो लगातार किसी न किसी महानुभाव को अपने कार्यक्रम में संबोधन के लिए न्योता दे रहे हैं। इस बार उन्होंने बुद्धिस्ट इंटरनेशनल रिसर्च सेंटर के चेयरमैन भदांत शांति मित्र को एक कार्यक्रम में बुलाया है। शनिवार को संघ के ट्रेनिंग कैंप का समापन है, इसीलिए स्वयंसेवकों को संबोधित करने के लिए शांति मित्र को बुलाया जा रहा है। रायबरेली में संघ का 20 दिनों से कार्यक्रम चल रहा है जिसका शनिवार को आखिरी दिन है। भदांत शांति मित्र डॉ.भीमराव अंबेडकर के सिद्धांतों को मानने वाले इंसान हैं। वह धार्मिक स्वतंत्रता और सामाजिक समानता के पक्ष में काफी मुखर रहते हैं। शनिवार को वह कार्यक्रम की अध्यक्षता करेंगे और संघ की गतिविधियों को नजदीक से देखेंगे। संघ के इस ट्रेनिंग कैंप में अवध प्रांत के 370 स्वंयसेवक शामिल हैं।

बता दें कि पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के बुलाने पर राजनीतिक पार्टियों द्वारा कई राजनीतिक मायने निकाले गए थे। इसीलए शनिवार के कार्यक्रम के बारे में आरएसएस का कहना है कि भदांत मित्र को बुलाए जाने में कोई राजनीतिक महत्वाकांक्षा नहीं है। आरएसएस अवध प्रांत के सहकार्यवाह प्रशांत भाटिया ने कहा, ‘हम पहले भी अलग-अलग क्षेत्र के लोगों को बुलाते रहे हैं। सबको यह दिखाने की कोशिश है कि संघ जाति और धर्म से ऊपर उठकर सबके लिए काम करता है।’

बता दें कि इससे पहले प्रणब मुखर्जी को बुलाने पर कांग्रेस औऱ आरएसएस, बीजेपी आमने सामने आ गईं थी। एक तरफ जहां आरएसएस का कहना था कि वो हमेशा से ही अपने विशेष कार्यक्रमों में देश के महान लोगों को बुलाते हैं जिनके संबोधन से देश कुछ सीख सके। वहीं कांग्रेस का कहना था कि बीजेपी और आरएसएस मिलकर प्रणब मुखर्जी का गलत राजनीतिक फायदा उठाएगी। यहां तक की प्रणब मुखर्जी की बेटी ने यह कह डाला था कि आरएसएस के लोग प्रणब दा के संबोधन भुलवा देंगे औऱ सिर्फ उनकी तस्वीर का कांग्रेस के खिलाफ इस्तेमाल करेंगे।

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