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बिहार में दल-बदल की एक प्रथा चल पड़ी है। मुख्यमंत्री से लेकर पूर्व मुख्यमंत्री और पार्टी अध्यक्ष तक सब इस पार्टी से उस पार्टी और उस पार्टी से इस पार्टी में छलांग लगाते नजर आ रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने अभी जल्द ही एनडीए छोड़ने की घोषणा कर दी और आरजेडी का हाथ थाम लिया। वहीं अब कांग्रेस के भी चार एमएलसी पार्टी छोड़कर जेडीयू का दामन थामने को तैयार हैं।  बिहार कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अशोक चौधरी की अगुवाई में कांग्रेस के कुल छह एमएलसी में से चार एमएलसी ने कांग्रेस का साथ छोड़ दिया। अशोक चौधरी के अलावा जिन एमएलसी ने कांग्रेस पार्टी छोड़ी है उनमें दिलीप चौधरी रामचंद्र भारती और तनवीर अख्तर के नाम शामिल हैं। होली के पहले हो रही ऐसी सियासी उलटफेर से बिहार का राजनीतिक रंग भी उड़ा हुआ है।

अशोक चौधरी के साथ दिलीप चौधरी, रामचंद्र भारती और तनवीर अख्तर ने कांग्रेस पार्टी छोड़ दिया है। ये लोग जेडीयू में शामिल होंगे। अशोक चौधरी कांग्रेस के कद्दावर नेता रहे हैं। करीब 2 दशक तक कांग्रेस से जुड़े रहे। इनके पिता महावीर चौधरी कांग्रेस के बड़े नेता था। आज अगर अशोक चौधरी कांग्रेस छोड़ने की बात कह रहे हैं तो ये सियायत के लिए बड़ी बात है। पार्टी छोड़ने के बाद अशोक चौधरी ने कांग्रेस के महामंत्री और बिहार प्रभारी सी पी जोशी पर पार्टी को तितर-बितर करने का सीधा आरोप लगाया। अशोक चौधरी ने कहा कि राहुल गांधी के नजदीकी होने का गलत फायदा उठाकर हमारे खिलाफ षडयंत्र रचा। एक व्यक्ति विशेष (काकब कादरी) को पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बनाने के लिए प्रदेश में पूरी पार्टी को तितर-बितर कर दिया।

अशोक चौधरी का कहना है कि मैंने अध्यक्ष पद संभालने के बाद बिहार में कांग्रेस को खड़ा किया। विधान परिषद में कांग्रेस के छह सदस्य बने। चार विधायक वाली पार्टी को 27 विधायक तक पहुंचाया। पर मेरे साथ क्या हुआ किसी से छिपा नहीं। अशोक चौधरी जेडीयू से जुड़ने के बाद अब सीएम नीतीश कुमार को बिहार के सर्वश्रेष्ठ मुख्यमंत्रियों में से एक बता रहे हैं और भविष्य के लिए कांग्रेस को चेतावनी भी दे रहे हैं।

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