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विविधताओं वाला भारत देश अपनी कई प्राचीन चीजों को खो चुका है। ऐसे में दुनिया की सबसे प्राचीन भाषा संस्कृत को बचाने के लिए गुजरात में पहल शुरू हो चुकी है। दरअसल, प्राचीन भाषा संस्कृत को लोकप्रिय बनाने के मकसद से गुजरात विश्वविद्यालय ने शनिवार को ‘बोलचाल की संस्कृत’ पर एक सिलेबस की घोषणा की। संभवत: देश में इस तरह का यह पहला सिलेबस होगा। वैसे भी देश और दुनिया में संस्कृत भाषा को जानने वालों की काफी कमी है और उन लोगों की तो और भी ज्यादा कमी है जो संस्कृत बोलते हों। ऐसे में गुजरात विश्वविद्यालय द्वारा चालू किया गया यह कोर्स आने वाले भविष्य के लिए संस्कृत भाषा के लिए काफी उत्कृष्ट होगा।

बाजार में इंग्लिश स्पीकिंग कोर्स का वैसे भी बोलबाला है। ऐसे में गुजरात यूनिवर्सिटी का संस्कृत स्पीकिंग कोर्स के तरफ रुझान एक अच्छी योजना है। केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने विश्वविद्यालय में सेंटर फॉर स्पोकन संस्कृत की शुरुआत की। यूनिवर्सिटी ने इस प्राचीन भाषा को वर्तमान और भविष्य में लोकप्रिय बनाने के लिए इस कोर्स की शुरुआत की है। अंग्रेजी स्पीकिंग की तर्ज पर शुरु हुआ संस्कृत स्पीकिंग कोर्स शायद देश में अपनी तरह का पहला और अनोखा कोर्स होगा।

‘सेंटर फॉर स्पोकन संस्कृत’ के समन्वयक अतुल उनागर ने कहा कि यह भारत में किसी विश्वविद्यालय की ओर से शुरू किया गया संभवत: ऐसा पहला सिलेबस है। उन्होंने कहा कि शनिवार और रविवार को इसकी कक्षाएं होंगी। उन्होंने कहा कि इस सिलेबस के लिए पहले से संस्कृत के किसी ज्ञान की जरूरत नहीं होगी। पहला बैच संभवत: 10 दिन में शुरू हो जाएगा और विश्वविद्यालय इस सिलेबस में अधिकतम 30 छात्रों को प्रवेश देगा. सिलेबस की फीस 500 रुपए तय की गई है। बता दें कि आरएसएस से जुड़ी संस्कृत भारती संस्था भी संस्कृत स्पीकिंग का कोर्स चलाती है। लेकिन यह कोर्स किसी यूनिवर्सिटी या किसी अन्य संस्थान से मान्यता प्राप्त नहीं है। संस्कृत भारती आवासीय शिविर आयोजित करके भी 10 दिवसीय संस्कृत स्पीकिंग कोर्स चलाती है।

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