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2019 लोकसभा चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव की मुश्किलें फिर बढ़ सकती है। दरअसल मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। वकील विश्वनाथ चतुर्वेदी ने शीर्ष अदालत में याचिका दायर कर मांग की कि सीबीआई को मुलायम, अखिलेश व प्रतीक यादव की संपत्तियों की जांच की रिपोर्ट अदालत में रखने का निर्देश दिया जाय।

याचिका में कहा गया है कि जांच पूरी हो गई थी और पहली नजर में पाया गया था कि यादव परिवार के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला बनता है। इस जांच को छह साल बीतने के बाद भी सीबीआई ने रिपोर्ट किसी अदालत में पेश नहीं की। 2013 में किए गए एक आकलन में ये संपत्ति आय से 24 करोड़ रुपये अधिक पाई गई थी।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने मार्च 2007 में चतुर्वेदी की जनहित याचिका पर सीबीआई को मुलायम, अखिलेश व पत्नी डिम्पल और भाई प्रतीक यादव की संपत्तियों की जांच करने का आदेश दिया था। हालांकि 2012 में सुप्रीम कोर्ट ने डिम्पल को इस मामले से यह कह कर बाहर कर दिया था कि वह किसी सार्वजनिक पद पर नहीं थीं।

इससे पहले सपा सरकार में हुए खनन घोटाले में सीबीआई की जांच पर अखिलेश यादव बीजेपी पर हमला कर चुके हैं। अखिलेश यादव ने तृणमूल कांग्रेस की ब्रिगेड परेड ग्राउंड में पिछले दिनों आयोजित रैली में कहा था कि हम पार्टियों से गठबंधन कर रहे हैं, मगर केंद्र की मोदी सरकार सीबीआई और ईडी जैसी एजेंसियों से गठबंधन कर रही है।

उन्होंने आगे कहा था कि आज अधिकारों को खतरा है। बंगाल मुझे आने का मौका कई बार मिला है। मगर आज जो मौका मिला है वह दूसरा है। जो बात बंगाल से चलेगी वह देश में दिखाई देगी। 12 तारीख को सपा-बसपा और हमारे सहयोगी दलों का गठबंधन हो गया। सब सोचते थे कि हमारा गठबंधन नहीं होगा। जब गठबंधन हुआ तो देश में खुशी की लहर दौड़ गई।

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