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इलाहाबाद हाई कोर्ट ने आज कांग्रेस की न्याय स्कीम पर नोटिस जारी किया है। हाई कोर्ट ने पूछा कि क्यों न इस चुनावी वादे को गरीबों को रिश्वत देने जैसा माना जाए? जस्टिस गोविंद माथुर और जस्टिस एसएम शमशेरी की डिविजन बेंच ने वकील मोहित कुमार की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा, ऐसी घोषणा क्यों न वोटरों को रिश्वत देने की कैटगरी में रखी जाए या फिर पार्टी पर पाबंदी या कोई दूसरी कार्रवाई की जाए।

कोर्ट ने इस मामले में चुनाव आयोग से जवाब तलब किया है। जवाब देने के लिए 2 हफ्ते का वक्त दिया गया है। कोर्ट ने माना कि ऐसी घोषणा रिश्वतखोरी और वोटरों को लुभाने की कोशिश है। बता दें कांग्रेस ने अपने चुनावी घोषणापत्र में गरीब परिवारों को सालाना 72 हजार रुपये देने का वादा किया है। इस योजना को कांग्रेस ने न्याय नाम दिया है। राहुल गांधी समेत कांग्रेस नेता इसका चुनावी रैलियों में जमकर प्रचार कर रहे हैं।

वहीं दूसरी ओर इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने आज कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की नागरिकता से जुड़ा मुद्दा उठाने वाली याचिता दाखिल की गई जिस पर कोर्ट ने योचिकाकर्ता को उचित जगह याचिका दाखिल करने का आदेश दिया है। याचिकाकर्ता रजनीश कुमार की अर्जी पर सुनवाई करते हुए जस्टिस देवेंद्र कुमार और जस्टिस मनीष माथुर की बेंच ने यह आदेश दिया है।

याचिकाकर्ता ने कोर्ट में दलील दी है कि राहुल गांधी ने लंदन की एक कंपनी में अपना रिटर्न दाखिल की है, उसमें अपनी नागरिकता ब्रिटिश बताई है। जो कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद -9 और भारतीय नागरिकता की धारा-9 का उल्लंघन है। उनकी भारतीय नागरिकता खत्म होनी चाहिए।

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