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देश की आजादी के लिए जिस धरती से संग्राम की पहली चिंगारी फूटी थी। उसी जमीन से बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने मिशन 2019 के लिए लौ जलाने का काम किया। मिशन 2019 पर मंथन के लिए मेरठ आयोजित प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में अमित शाह ने कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों में उत्साह भरते हुए कहा कि विपक्ष के महागठबंधन से घबराने की जरूरत नहीं है। 2019 में जीत दिलाना उनकी जिम्मेदारी है। उन्होंने पिछले चुनाव के मुकाबले इस बार एक सीट ज्यादा जीताने का संकल्प भी दिलाया।  मिशन 2019 पर मंथन करने के लिए मेरठ में आयोजित उत्तर प्रदेश बीजेपी कार्यसमिति की दो दिवसीय बैठक को आखिरी दिन बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने संबोधित किया। लोकसभा सीटों के लिहाज से देश के सबसे बड़े सूबे के पश्चिमी क्षेत्र में आयोजित बैठक में अमित शाह ने कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों में उत्साह भरते हुए अगले लोकसभा चुनाव का लक्ष्य भी तय कर दिया।

2014 के चुनाव में बीजेपी और उसके सहयोगी दलों को कुल 73 सीटों पर जीत मिली थी। अमित शाह ने इस बार एक सीट ज्यादा जीतने का संकल्प दिलाया।पिछले लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में विपक्ष की लुटिया डूब गई थी। .कांग्रेस को जहां दो सीटें मिली थी। वहीं समाजवादी पार्टी को पांच सीटों पर जीत हासिल हुई थी। लेकिन बीएसपी और अजीत सिंह की पार्टी का तो खाता ही नहीं खुला था। छोटे दलों की तो बात ही बेमानी है। इस बार विपक्षी दल बीजेपी को पटखनी देने के लिए गठबंधन बनाने की तैयारी में हैं। लेकिन अमित शाह इस महागठबंधन से बेफिक्र नजर आते हैं। और अपनी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को भी महागठबंधन से बेफिक्र होकर मोदी और योगी सरकार के कार्यों को जन-जन तक पहुंचाने को कहा। बीजेपी अध्यक्ष आधुनिक राजनीति के चाणक्य माने जाते हैं। अब तक की उनकी सियासी रणनीति सफल भी होती रही है। ऐसा लगता है कि अगले लोकसभा चुनाव में भी पार्टी को विजय दिलाने की उन्होंने रणनीति बना ली है। .तभी तो कार्यसमिति की बैठक में अमित शाह ने डंके की चोट पर कार्यकर्ताओं से कहा कि अगले लोकसभा चुनाव में जीत दिलाना उनकी जिम्मेदारी है।

प्रदेश की सियासत में पश्चिमी उत्तर प्रदेश का काफी अहम है। और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मेरठ राजनीति का एक बड़ा केंद्र है। यही वजह रही कि बीजेपी ने 21 साल बाद यहां कार्य समिति की बैठक आयोजित की। इससे पहले कानपुर, मिर्जापुर, चित्रकूट और लखनऊ में प्रदेश कार्यसमिति बैठक हो चुकी है। प्रदेश में हाल के दिनों में हुए उपचुनावों में सपा-बसपा-रालोद गठबंधन से मिली हार के बाद इस तिकड़ी को मात देने के लिए आगे की रणनीति भी इस बैठक में तैयार की गई। ताकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सियासी जमीन से 2014 और 2017 जैसी कामयाबी फिर से हासिल की जा सके। कार्यसमिति का उद्गघाटन केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने किया था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दोनों दिन बैठक में मौजूद रहे। उनके साथ ही प्रदेश के विधायक। सांसद। .मंत्री और तमाम पदाधिकारी भी बैठक का हिस्सा बने।

एपीएन ब्यूरो

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