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राजनीति में कब उलट फेर हो जाए, सियासी ऊंट कब करवट बदल लें, इसका अनुमान लगाना बेहद मुश्किल है। 2017 के इन विधानसभा चुनावों में तो खास तौर पर ऐसा ही हुआ। किसी का गठबंधन हुआ तो किसी का टूट गया। सत्ता में आने के लिए हर हथकंडे को पार्टियों द्वारा अपनाया गया। जहां सपा और कांग्रेस का गठबंधन हुआ वहीं बीजेपी और शिवसेना का साथ छूट गया। महाराष्ट्र में तो बीजेपी अपनी धाक जमाने में कामयाब रही लेकिन ऐसा ही दबदबा यूपी में बनेगा, इस पर तो बस अभी कयास ही लगाए जा सकते हैं। महाराष्ट्र में हुई जीत का यूपी में विजय दिवस मनाना क्या जनता की मानसिकता को बदल पाएगा? और साथ ही खबरें आ रही हैं कि महाराष्ट्र चुनाव को मद्देनजर रखते हुए कांग्रेस और शिवसेना का गठबंधन हो सकता है, क्या ये खबरें महज बीजेपी पर दबदबा बनाने के लिए अफवाहें साबित होगीं या फिर सपा की तरह कांग्रेस अपने फायदे के लिए अब शिवसेना से हाथ मिला लेगी? यह सियासत में बदलता हुआ समीकरण आखिर क्या रंग लाएगा?

इन्हीं तमाम मुद्दों पर विचार विमर्श करने के लिए  25 फरवरी को एपीएन स्टूडियो में कुछ मेहमानों को बुलाया गया जिनमें अनिला सिंह (प्रवक्ता, बीजेपी), गोविंद पंत राजू ( सलाहकार संपादक, एपीएन), सरबत जहां फातिमा (प्रवक्ता, कांग्रेस), जगदेव सिंह यादव (प्रवक्ता, सपा) शामिल थे वहीं नावेद सिद्दीकी ( प्रवक्ता, सपा) फोन पर जुड़े। मुद्दे का संचालन किया एंकर हिमांशु दीक्षित ने।

अनिला सिंह ने कहा कि बीजेपी उत्साहित है क्योंकि बीजेपी की लहर पूरे भारत में है। देश की जनता बीजेपी के साथ खड़ी है, यह बात बीएमसी चुनाव से साबित हो चुकी है। जिस तरीके से महाराष्ट्र की जनता ने बीजेपी का साथ दिया है, यूपी की जनता भी बीजेपी को स्पोर्ट करेगी और रही बात कांग्रेस- शिवसेना गठबंधन की तो ये शिवसेना के प्रमुख उद्धव ठाकरे तय करेंगे या कांग्रेस के नेता। लेकिन एक बात तय है कि शिवसेना अकेले कुछ नहीं कर सकती क्योंकि उसके पास बहुमत नहीं है। कांग्रेस एक मौकाप्रस्त पार्टी है जो सत्ता में रहने के लिए किसी का भी दामन थाम लेती है। महाराष्ट्र चुनाव के नतीजों से नोटबंदी का मुद्दा धराशाही हो चुका है जिसको विपक्षी दल जोर शोर से उठा रहे थे।

सरबत जहां फातिमा ने कहा कि मुंबई और यूपी के मुद्दे अलग अलग हैं। हो सकता है वहां के लोगों को नोटबंदी से दिक्कत न हुई हो लेकिन यूपी की स्थिति कुछ और थी, नोटबंदी का असर अब तक बरकरार है। ऐसे हालातों में यूपी की जनता बीजेपी का साथ कैसे दे पाएगी? यूपी अपने मुद्दों के आधार पर ही वोट देगी। और रही बात गठबंधन की तो गठबंधन तब होता है जब मकसद एक हो। गठबंधन को नकारते हुए सरबत ने कहा कि शिवसेना से कांग्रेस की आइडियोलॉजी नहीं मिलती तो गठबंधन होने के कोई आसार नहीं है।

नावेद सिद्दीकी ने कहा कि जो काम करते हैं वो लोग लगातार काम करते हैं इस तरह दिखाते नहीं हैं। बीएमसी छोटा चुनाव है, यूपी का स्तर बहुत बड़ा है। केंद्र सरकार का बनना यूपी से तय होता है। तो बीजेपी की यह गलतफहमी है कि बीएमसी में जीत हुई तो यूपी में भी होगी ही। मेहनती लोग खुशियों का इजहार कम करते हैं। खैर 11 मार्च को सब साफ हो जाएगा । झूठे वादों से सरकार नहीं चलती।

जगदेव सिंह यादव ने कहा कि राजनीति में कोई चीज स्थायी नहीं है, न तो यहां दोस्त स्थायी है, न दुश्मन । बीजेपी ने देश की जनता का विश्वास तोड़ा है। नोटबंदी से सब बर्बाद कर दिया है। विकास नहीं किया, मात्र सपना दिखाने की सरकार बन गई है बीजेपी।  

 गोविंद पंत राजू ने कहा कि बीएमसी चुनाव का यूपी चुनाव पर भले ही सीधा और ज्यादा असर न पड़े लेकिन शहरी क्षेत्रों से जो नतीजा आया है उससे राजनीति दलों का जो संशय था नोटबंदी को लेकर वो स्पष्ट हो गया है। नोटबंदी की वजह से बीजेपी को नुक्सान नहीं हुआ। बीएमसी चुनावों में अमीर गरीब हर वर्ग के लोगों ने मतदान किया है तो बीजेपी को नोटबंदी की वजह से नकारात्मक परिणाम नहीं मिला तो यूपी में भी जनता की मानसिकता पर असर होगा और वहां भी बीजेपी को फायदा होने के आसार हैं। बीजेपी के नेताओं को नैतिक बल मिला है बीएमसी चुनावों से। हम दोनों राज्यों के चुनावों की तुलना नहीं कर सकते मगर जीत को भी नजरअंदाज भी नहीं कर सकते। कांग्रेस- शिवसेना के गठबंधन पर उन्होंने कहा कि शिवसेना और बीजेपी दोनों को ही साथ की जरुरत है मगर बीएमसी की ज़मीनी हकीकत को देखें तो कांग्रेस के जो लोग चुन कर आए हैं वो कांग्रेस के साथ बने रहेंगे, ये कांग्रेस के लिए चुनौती होगी।

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