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राफेल डील को लेकर कांग्रेस की ओर से बार-बार केंद्र सरकार पर सवाल उठाए जा रह है। वहीं विपक्ष को सरकार को घेरने का एक बहुत अच्छा मुद्दा मिल गया है जिसे वह लोकसभा चुनाव और आगामी विधानसभा चुनाव के दौरान भुनाने की तैयारी में है। विपक्ष ने इस सौदे को घोटाला बताया है। अरुण जेटली ने कहा कि नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (कैग) राफेल सौदे की कीमत की जांच करेगा। लेकिन यह डील रद्द नहीं होगी। उन्‍होंने कहा कि कैग इस बात को भी परखेगी कि कांग्रेस नीत यूपीए सरकार में राफेल विमान की सौदेबाजी बेहतर थी या बीजेपी नीत एनडीए सरकार में हो रही डील बेहतर है। सरकार सभी तथ्यों और आंकड़ों को कैग के सामने पेश करेगी। उसके बाद कैग ही फैसला करेगा। हम कैग की रिपोर्ट का इंतजार करेंगे।

रविवार को वित्त मंत्री अरुण जेटली ने राहुल गांधी के ट्वीट पर सवाल उठाया था। उन्होंने पूछा था कि फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांक्वा ओलांद का बयान आने से पहले राहुल को उनके आने वाले बयान के बारे में कैसे पता था। उन्होंने कहा था कि मेरे पास इस जुगलबंदी का कोई सबूत नहीं हैं लेकिन इससे मन में सवाल खड़े होते हैं।

अरुण जेटली ने कहा कि राफेल डील में अनिल अंबानी को फायदा पहुंचाने के आरोपों पर अरुण जेटली ने कहा कि अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस राफेल सौदे में एक एमओयू के तहत फरवरी 2012 में तब शामिल हुई थी, जब केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी। ये सारे आंकड़े कैग के सामने हैं। कांग्रेस भी कैग के पास गई है। उन्होंने कहा कि हम कैग की रिपोर्ट का इंतजार करेंगे। वित्त मंत्री ने कहा कि हालांकि उनके पास इसके कोई सबूत नहीं है, मगर सवाल तो उठता ही है कि 29 सितंबर को राहुल ट्वीट के जरिए राफेल मामले में पेरिस में बम धमाके की घोषणा की और इसके तत्काल बाद ओलांद कहते हैं कि राफेल करार में रिलायंस का नाम सरकार ने सुझाया। उन्होंने कहा कि राफेल बनाने वाली कंपनी और फ्रांस सरकार दोनों ने ओलांद के दावे का खंडन किया है।

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