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पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के निधन पर अमेरिका, रूस, जापान, बंगलादेश, श्रीलंका, नेपाल, पाकिस्तान आदि विभिन्न देशों ने गहरा शोक व्यक्त किया है। अमेरिका के विदेश मंत्री माइकल पोम्पियो ने अपने शोक संदेश में वाजपेयी के भारत के एक वैश्विक एवं आर्थिक महाशक्ति बनाने के योगदान को याद किया और कहा कि उन्होंने प्रत्येक भारतीय के जीवन को उन्नत बनाने के लिए अथक परिश्रम किया।

पोम्पियो ने कहा कि वर्ष 2000 में अमेरिकी कांग्रेस को अपने संबोधन में श्री वाजपेयी ने भारत अमेरिका के संबंधों को समान प्रयासों की स्वाभाविक साझेदारी करार दिया था। उन्होंने बहुत पहले ही पहचान लिया था कि समान लोकतांत्रिक मूल्यों के आधार पर भारत एवं अमेरिका एक साझेदारी विकसित कर सकते हैं जो क्षेत्रीय एवं वैश्विक आर्थिक समृद्धि और सुरक्षा के लिए काम करेगी। उन्होंने कहा कि अमेरिका की जनता और सरकार भारतीय लोगों के शोक में साझीदार है।

अफगानिस्तान के राजदूत डा. शाइदा अब्दुल्ला ने कहा कि ना केवल भारत बल्कि समूचे  दक्षिण एशिया ने एक कद्दावर नेता को खो दिया है जिसने हमारे लिए नेतृत्व के सर्वोच्च मानक छोड़े हैं। भारत के लोगों को हुई इस बड़ी क्षति पर हम शोकाकुल हैं। अफगानिस्तान के लोग श्री वाजपेयी के परिवार और समूचे भारत के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करते हैं।भारत में ब्रिटेन के उच्चायुक्त ने कहा कि हम पूर्व प्रधानमंत्री वाजपेयी के निधन से दुखी हैं। हम उन्हें भारत के महानतम नेताओं में से एक के रूप में याद करते हैं। उन्हें ब्रिटेन में एक राजनेता के रूप में बहुत सम्मान पूर्वक देखा जाता है।

नेपाल में श्री वाजपेयी की अंत्येष्टि में शामिल होने के लिए अपने विदेश मंत्री प्रदीप ग्यावली को नयी दिल्ली भेजने का फैसला किया है।

नेपाल के प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को भेजे एक शोक संदेश में कहा कि श्री वाजपेयी बेदाग निष्ठा एवं समर्पण वाले एक दूरद्रष्टा राजनेता थे जिन्हें भारत के लोगों की निस्वार्थ एवं अनुकरणीय सेवा के लिए हमेशा याद किया जाएगा। श्री वाजपेयी के निधन से विश्व ने एक कद्दावर राजनीतिज्ञ और नेपाल ने एक सच्चा मित्र एवं हितैषी खो दिया है। उन्हें भारत नेपाल मैत्री को मज़बूत करने के लिए याद किया जाएगा।

बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने अपने शोक संदेश में कहा कि हम भारत के सबसे महान सपूतों में एक वाजपेयी के निधन का समाचार सुन कर गहरे सदमे में हैं। उन्हें क्षेत्रीय समृद्धि और शांति के लिए याद किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बंगलादेश के अभिन्न मित्र के रूप में उन्हें बहुत सम्मान प्राप्त थो और 1971 के युद्ध में अमूल्य योगदान के लिए उन्हें मुक्तिजोधा सेनानी के सम्मान से अलंकृत किया गया था।

जापान के राजदूत हिरामातू ने कहा है कि उन्हें वाजपेयी के निधन से गहरा शोक पहुंचा है। उन्होंने कहा, “वाजपेयी हमारे समय के सबसे प्रेरक नेताओं में से एक थे। जापान और भारत के संबंधों को ऊंचाईयां श्री वाजपेयी की पहल से मिली हैं। महान नेता के निधन से न केवल भारत को हानि हुई है बल्कि जापान, एशिया और विश्व समुदाय को भी नुकसान हुआ है।

रुस के राजदूत निकोलय कूदासेव ने शोक व्यक्त करते हुए कहा है कि वाजपेयी एक बड़े कूटनीतिज्ञ थे। वह भारतीय राजनीतिक इतिहास के अभिन्न हिस्सा रहेंगे। वह जीवनभर राष्ट्र सेवा के लिए समर्पित रहे। उनका भारत के अलावा पूरी दुनिया में सम्मान है। वह रुस के सच्चे मित्र थे। वह एक कवि और ज्ञानी पुरूष थे।

साभार- ईएनसी टाईम्स

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