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राफेल को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई पुर्नविचार याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में आज जोरदार बहस हुई। बहस के दौरान वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने सरकार पर जानकारी छुपाने का आरोप लगाया तो वहीं सरकारी पक्ष ने ऑफीशियल सीक्रेट एक्ट के उल्लंघन का आरोप लगाया।

सरकारी पक्ष की ओर से अटॉर्नी जनरल ने कहा कि कुछ दस्तावेज रक्षा मंत्रालय से गायब हुए, चोरी वाले दस्तावेज अखबार में छपे है। सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने नए दस्तावेज कोर्ट में रखने की मांग की, जिसे कोर्ट ने ठुकरा दिया। प्रशांत भूषण ने कहा कि कोर्ट से 7 सदस्यीय टीम ऑफ नेगोसीएटर्स की फ़ाइल नोटिंग छुपाई गयी।

इस पर अटॉर्नी जनरल ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि ये जिन दस्तावेजों की बात कर रहे हैं। वो रक्षा मंत्रालय से गायब हुए, दस्तावेज किसने गायब किए इसकी जांच की जा रही है? क्या इस तरह से दो देशों के बीच रक्षा समझौता होगा। सबकी सुनो। मीडिया को खुश करो। फिर कोर्ट में खड़े हो जाओ। हिंदू अखबार नामक को प्रभावित करने के लिए खबरें छाप रहा है। अटॉर्नी जनरल ने कहा, ”इसमें से भी चुनिंदा चीजें दिखा रहे हैं जो इन्हें रासआते हैं।

अंतिम बातें जहां डील की सहमति है, कोर्ट को नहीं बता रहे। क्या इस तरह से दो देशों के बीच रक्षा समझौता होगा, सबकी सुनो। मीडिया को खुश करो। फिर कोर्ट में खड़े हो जाओ। हिंदू अखबार नामक को प्रभावित करने के लिए खबरें छाप रहा है।”

दस्तावेज चोरी के आरोपों को गंभीरता से लेते हुए चीफ जस्टिस ने कहा, ”आप कह रहे हैं कि चोरी हुए कागज़ात अखबार में छपे? आप लंच के बाद हमें बताएं कि इस मसले पर आपने क्या कार्रवाई की। 2 बजे सुनवाई जारी रखेंगे।”

जस्टिस केएम जोसेफ ने सुनवाई के दौरान बड़ी टिप्पणी की। उन्होंने केके वेणुगोपाल से कहा कि क्या आप कह रहे हैं कि भ्रष्टाचार की जांच सिर्फ इसलिए ना हो कि सोर्स असंवैधानिक है। हमें सबूतों की जांच करनी होगी. उन्होंने कहा कि चोरी किए गए सबूत भी महत्वपूर्ण हैं, इसकी जांच होना जरूरी है।

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने AG के के वेणुगोपाल से पूछा है कि अगर आपको लगता है कि राफेल के कागज चोरी हुए हैं और अखबारों ने चोरी किए हुए कागजों पर लेख लिखे हैं तो सरकार ने कोई कार्रवाई क्यों नहीं की।

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