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जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय कैंपस में हिंदू संगठनों की रथ यात्रा के बाद बाबर व बाबरी मस्जिद का पुतला जलाया गया। साबरमती ढाबे के बाहर पुतला जलाते हुए जय श्रीराम के नारे भी लगे। रथ यात्रा व पुतला दहन के बाद राजनीति गरमा गई है। वामपंथी संगठनों ने विश्वविद्यालय प्रबंधन समेत बीजेपी पर कैंपस को भगवा करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि आखिर रथ यात्रा विश्वविद्यालय प्रबंधन की इजाजत के बिना कैंपस में कैसे पहुंची। वहीं, वामपंथी संगठन विश्वविद्यालय प्रबंधन से पूरे मामले पर जवाब मांग रहे हैं जेएनयू कैंपस में बृहस्पतिवार शाम को साबरमती ढाबे के बाहर गांधी-आंबेडकर व कलामवादी हिंदू छात्र संगठन के पदाधिकारी राघवेंद्र मिश्रा की अध्यक्षता में बाबर और बाबरी मस्जिद का पुतला जलाया गया।

पुतला जलाते हुए जल्द से जल्द अयोध्या में राम मंदिर बनवाने की मांग रखी। इस दौरान जय श्रीराम के नारे भी लगाए। वहीं, रथ यात्रा मामले पर राजनीति गरमाई रही। छात्रसंघ ने विश्वविद्यालय प्रबंधन के उस बयान को नकार दिया, जिसमें कहा गया था कि वीडियो पुरानी है। कैंपस में कोई रथ यात्रा नहीं निकाली गई है। छात्रसंघ ने विश्वविद्यालय के गेट पर आने-जाने वाले वाहन चालकों के हाजिरी रजिस्टर की फोटो वायरल कर दी। जेएनयू रजिस्टर में वाहन चालकों का नाम व आने-जाने का समय भी चिह्नित है।

छात्रसंघ का कहना है कि कुलपति प्रो. एम. जगदीश कुमार कैंपस को भगवा करने में लगे हैं। इसी के चलते विश्वविद्यालय को अयोध्या बना दिया। भगवान श्रीराम सभी के लिए पूजनीय हैं। कैंपस में राम मंदिर बनवाने के नाम पर रथ यात्रा निकालना गलत है। शिक्षा के मंदिर में धर्म, जाति, संप्रदाय, भाषा, प्रांत के नाम पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। शिक्षक यूनियन ने भी सवाल उठाए हैं। यूनियन का कहना है कि विश्वविद्यालय में कोई धर्म बड़ा या छोटा नहीं होता है। रथ यात्रा के बाद कैंपस में बाबर का पुतला भी जला दिया जाता है, लेकिन विवि प्रबंधन चुप है। ऐसे में सवाल उठते हैं कि विश्वविद्यालय प्रबंधन कैंपस का माहौल खराब क्यों कर रहा है।

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