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यूपी के सरकारी अस्पतालों में लापरवाही के मामले बढ़ते ही जा रहे हैं। कभी गलत इलाज के कारण मरीज को जान गंवानी पड़ती है तो कभी गंदगी से इंफेक्शन फैलने का खतरा सिर पर मंडराता रहता है। ताजा मामला बहराइच और लखनऊ का है। बहराइच के जिला अस्पताल में इन दिनों मस्तिष्क ज्वर के मरीजों की भरमार है। सीधे तौर पर जिला अस्पताल प्रशासन ने यह नहीं बताया कि मस्तिष्क ज्वर के कितने मरीज भर्ती हैं। लेकिन एक सवाल के जवाब में मुख्य चिकित्सा अधीक्षक ओपी पाण्डेय ने बताया 19 मरीजों के सैम्पल जांच के लिए लखनऊ भेजे गए हैं।

दिमागी बुखार से पीड़ित बच्चों का फर्श पर इलाज
जिला अस्पताल में भर्ती मरीजों के लिये बेड कम पड़ चुके हैं।हालत यह है कि बड़ी तादाद में मासूम बच्चों का इलाज फर्श पर हो रहा है। मस्तिष्क ज्वर के मरीजों को झटके आते रहते हैं लेकिन उनकी देखभाल करने वाला कोई नहीं है। जिला अस्पताल के वार्ड में लोग जूते-चप्पलें पहन कर घूमते रहते हैं। इसके लिए सीएमएस ने अभी तक 10 हज़ार रुपये की जुर्माना राशि भी वसूली है। खुद सीएमएस भी मानते हैं कि अस्पताल में मरीज़ों की संख्या काफी है। इसलिए एक बेड पर दो-दो मरीजों के साथ ही कई का जमीन पर इलाज चल रहा है।

लोकबंधु अस्पताल में भी गरीब भगवान भरोसे
यूपी की राजधानी लखनऊ के आलमबाग स्थित लोकबंधु अस्पताल की तस्वीरें भी कुछ ऐसी ही हैं।यहां अस्पताल प्रशासन की लापरवाही तस्वीरों में साफ दिख रही है। यहां इलाज कराने आय बच्चों को देखकर उनके माता-पिता की कलेजा हिल जाता है। लेकिन आर्थिक स्थिति कमजोर होने के चलते यहां आने को मजबूर हैं। शहर के बीचों-बीच बने इस अस्पताल में बच्चों के टूटे पैर को पत्थर के सहारे लटकाया जा रहा है।

जमीन पर लेटी बुजुर्ग महिला को बेड नसीब नहीं
अस्पताल अधीक्षक के रूम के बाहर एक बुजुर्ग महिला लेटी हुई दिखीं जिनके हाथ में विगो लगी है लेकिन उसके इलाज के लिए न तो डॉक्टर्स के पास वक्त है न अस्पताल में बेड। पूरे अस्पताल में जैसे बेड का अकाल पड़ा है। एक बेड पर दो-दो बच्चों का इलाज किया जा रहा है। ऐसे में इन बच्चों पर इंफेक्शन का खतरा मंडराता रहता है। वहीं अस्पताल प्रशासन कैमरे के सामने मुंह खोलने को राजी नहीं है। इन हालातों में आप अंदाजा लगा सकते हैं कि जब लोकबंधु अस्पताल में बीमार का ये हाल है तो तीमारदारों की क्या दशा होगी।

ब्यूरो रिपोर्ट, एपीएन

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