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केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने मुरादाबाद समेत प्रदेश के सभी जिलों के सरकारी अस्पतालों में बच्चों को पोलियो की दवा पिलाने पर रोक लगा दी है। यह कार्रवाई पिछले महीने गाजियाबाद की बायोमेड कंपनी की दवा में पी-2 वायरस पाए जाने के बाद की गई है। अन्य कंपनियों की वैक्सीन नहीं होने से नवजात बच्चों को पोलियो की खुराक नहीं पिलाई जा रही है। जिससे पोलियो उन्मूलन अभियान को बड़ा झटका लगा है।

बता दें कि सरकारी अस्पतालों में नवजात बच्चों को पोलियो की खुराक दी जाती है। बच्चे के जन्म से आधे घंटे से लेकर 15 दिन के बीच पहली खुराक दी जाती है। इससे बच्चे के शरीर में पोलियो वायरस से लड़ने की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। इसके बाद डेढ़ माह, ढाई माह, साढ़े तीन साल तक दवा पिलाई जाती है। पांच साल की उम्र तक बूस्टर लगाया जाता है।

सीएमएस डॉ. कल्पना सिंह ने बताया कि बायोमेड कंपनी की वैक्सीन बंद होने से पोलियो की दवा नहीं दी जा रही है। स्वास्थ्य मंत्रालय एवं निदेशालय से इस दिशा में अभी तक कोई नए दिशा निर्देश नहीं आए हैं। हालांकि, बच्चों को आईपीवी लगाए जा रहे हैं।

बायोमेड कंपनी की ओरल पोलियो वैक्सीन में टाइप-टू वायरस मिला था। इसके बाद पूरे प्रदेश में अलर्ट जारी कर बच्चों को यह वैक्सीन पिलाने पर रोक लगा दी गई। हालांकि परिवार कल्याण महानिदेशक की ओर से जारी इस आदेश में वैक्सीन पिलाने पर रोक लगाने की वजह नहीं बताई गई है, मगर आदेश आने के बाद बरेली मंडल के चारों जिलों से यह वैक्सीन वापस मंगा ली गई है।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के मुताबिक यह वैक्सीन यूपी के तमाम जिलों में भेजी जाती थी। बरेली मंडल के चारों जिले भी इसमें शामिल हैं। हाल ही में इस पोलियो वैक्सीन में टाइप टू वायरस मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग में ऊपर से नीचे तक खलबली मची हुई है। इसके बाद परिवार कल्याण महानिदेशक की ओर से पूरे प्रदेश में अलर्ट जारी कर इस वैक्सीन के इस्तेमाल पर रोक लगा दी गई है।

पोलियो वैक्सीनेशन प्रोग्राम के लिए बायोमेड समेत पांच कंपनियां दवा सप्लाई करती है। बायोमेड की बनाई ओरल वैक्सीन में टाइप टू पोलियो वायरस मिलने के बाद बायोमेड के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराकर कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर को गिरफ्तार किया गया।

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