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अस्पताल की यह बिल्डिंग भले ही किसी शानदार होटल जैसी दिखती हो। रोजाना सैकड़ों की संख्या में मरीज ओपीडी में इलाज कराने आते हैं। लेकिन उनमें से गिनती के मरीजों को ही अस्पताल से दवाएं मिल पाती हैं। बेस चिकित्सालय हमेशा दवाइयों का टोटा बना रहता है। बड़ी बीमारियों की दवाएं तो दूर कई बार सर्दी-जुकाम की दवाएं भी अस्पताल से नहीं मिलती हैं। ऐसे में कोटद्वार बेस अस्पताल में पौड़ी जिले के दूर-दराज के इलाकों से इलाज कराने आए मरीजों को कभी डॉक्टरों की कमी तो कभी दवाईयों की कमी से मरीजों को जूझना पड़ता है। उन्हें बाहर से मंहगी दवाएं खरीदनी पड़ती हैं। मरीजों को आने-जाने और ओपीडी में जितना खर्च नहीं होता उससे ज्यादा महंगी दवाइयां खरीदनी पड़ती हैं। बेस चिकित्सालय कोटद्वार के सीएमस आईएस सावंत दवाईयों की कमी की बात स्वीकारते हैं।

मरीजों को यहां सुविधाएं कम और परेशानी ज्यादा झेलनी पड़ती है। अस्पताल की फॉर्मेसी में टेबलेट है तो सिरफ नहीं है। कई बीमारियों की दवाईयां तो गायब ही हैं। वहीं बरसात में वायरल मरीजों की संख्या तीस प्रतिशत से ज्यादा बढ़ चुकी हैं लेकिन बेस चिकित्सालय में दवाईयों का टोटा बना है। जबकि, बुखार, खांसी, पेट संबधित बीमारियों के मरीज बरसात के मौसम में ज्यादा है। डॉक्टर मरीजों के पर्चे पर चार दवाईयों का नाम लिखते हैं लेकिन चिकित्सालय से सिर्फ एक मिलती है बाकि तीन बाजार से खरीदनी पड़ती हैं।

अस्पताल की बिल्डिंग भले ही किसी पांच सितारा होटल जैसी दिखती हो लेकिन मरीजों को यहां सुविधाएं कम और परेशानी ज्यादा झेलनी पड़ती है।मरीजों का कहना है कि अस्पताल में आने पर सिर्फ ओपीडी का खर्चा कम होता है लेकिन दवाइयों का बोझ इतना हो जाता है कि इलाज कराना मुश्किल हो जाता है।

ब्यूरो रिपोर्ट, एपीएन

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