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न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा ने 45वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने राष्ट्रपति भवन के दरबार हाल में एक सादे समारोह में न्यामूर्ति मिश्रा को शपथ ग्रहण कराई।  इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई गणमान्य लोग वहां मौजूद थे। बता दें कि हाल ही में सेवानिवृत्त हुए चीफ जस्टिस जेएस खेहर ने दीपक मिश्रा की नाम की सिफारिश की थी। दीपक मिश्रा का चुनाव वरिष्ठता के आधार पर हुआ है। उनका कार्यकाल 2 अक्टूबर 2018 को खत्म हो जाएगा। दीपक मिश्रा ने अपने कैरियर में कई ऐसे फैसले दिए जिसने देश की तस्वीर बदलने का काम किया। उन्हीं में से पांच ऐसे फैसले भी थे जिनको लोग कभी नहीं भूल पाएंगे।

  1. आतंकवादी याकूब मेमन को 1993 के बम धमाकों के लिए दोषी ठहराया गया था। इसके लिए उसे फांसी की सजा सुनाई गई थी। फांसी से ठीक पहले मेमन ने सजा पर रोक लगाने के लिए दया याचिका डाली थी। इस मामले में 13 जुलाई 2013 को अदालतें खुली। तीन जजों की पीठ को इस पर पुनर्विचार करना था। इन तीन जजों में दीपक मिश्रा भी थे। उन्होंने दया याचिका को खारिज करते हुए फांसी की सजा बरकरार रखी।
  2. सिनेमा हॉल में फिल्म शुरू होने से पहले राष्ट्रगान करवाने का फैसला भी दीपक मिश्रा का था। 30 नवंबर 2016 में सुप्रीम कोर्ट में दीपक मिश्रा और अमिताव रॉय की खंडपीठ ने यह फैसला दिया कि फिल्म शुरू होने से पहले राष्ट्रगान होगा और सभी लोग राष्ट्रगान के समय खड़े होंगे।
  3. लोगों की परेशानियों को देखते हुए 7 सितंबर 2016 को जस्टिस दीपक मिश्रा और जस्टिस सी नगाप्पन की बेंच ने सभी राज्यों को आदेश दिया कि एफआईआर की कॉपी 24 घंटों के अंदर वेबसाइटों पर अपलोड किया जाए ताकि लोगों को इसके लिए इधर-उधर भटकना न पड़े।
  4. उत्तर प्रदेश की मायावती सरकार प्रमोशन में भी आरक्षण चाहती थी। उनका कहना था कि प्रमोशन में भी आरक्षण दिया जाए। उनकी इस नीति को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया और इस पर रोक लगा दी। इस विषय को लेकर सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंची। वहां दो जजों की पीठ में इस विषय को लेकर सुनवाई चली जहां कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा। इन दो जजों में जस्टिस दीपक मिश्रा भी थे।
  5. निर्भया गैंगरैप केस मामले में दोषियों को सजा सुनाने वाले जजों में जस्टिस दीपक मिश्रा भी शामिल थे। दिसंबर 2012 में चलती बस में एक युवती के साथ चलती बल में रेप और अमानवीय कृत्य किया गया था। साथ ही उसके साथ लड़के को भी बुरी तरह मारा पीटा गया था। इस केस के बाद पूरे भारत में विरोध प्रदर्शन हुआ था। तब जस्टिस दीपक मिश्रा ने जस्टिस आर भानुमति और जस्टिस अशोक भूषण की पीठ ने दोषियों को फांसी की सजा सुनाई। साथ ही कहा कि ये केस रेयर ऑफ द रेयरेस्ट की श्रेणी में आता है।

यही नहीं आपराधिक मानहानि कानून, 2008 में चार साल की बच्ची से दुष्कर्म और आरोपी को फांसी की सजा, सबरीमाला मंदिर का द्वार महिला श्रद्धालुओं को खोलने जैसे कई मामलों में जस्टिस दीपक मिश्रा ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है।

अब मुख्य न्यायाधीश के तौर पर इस 14 महीने के कार्यकाल में उनके पास कई ऐसे मुद्दे हैं जिनपर उनको फैसला सुनाना है। अब जस्टिस दीपक मिश्रा अयोध्या भूमि मालिकाना हक मामले के अलावा कावेरी जल विवाद, सेबी-सहारा अदायगी विवाद, बीसीसीआई सुधार, पनामा पेपर लीक और निजता नीति जैसे अहम मुद्दों पर फैसला करने वाली पीठों का हिस्सा होंगे। ऐसे में पूरे देश की निगाहें उन पर टिकी रहेगी।

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