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बिहार के सीतामढ़ी में माता सीता का भव्य मंदिर बनाया जाएगा। राज्य सरकार माता सीता के भव्य मंदिर के लिए एक बड़ी योजना शुरु करने जा रही है। मंगलवार को सीता की जन्मस्थली पुनौरा धाम सीतामढ़ी में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इसका ऐलान किया। इस कार्यक्रम में डिप्टी सीएम सुशील मोदी भी मौजूद रहें।

सरकार मौजूदा सीता मंदिर को भव्य रूप देने की तैयारी में है। यह पहल बिहार सरकार और पर्यटन मंत्रालय के सहयोग से ‘रामायण सर्किट’ के तहत आगे बढ़ाई जाएगी। बीजेपी नेता प्रभात झा पिछले सात साल से इस काम में लगे हैं।

झा ने कहा, ‘मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पुनौरा धाम को धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में बनाने का आग्रह मंजूर कर लिया है।’ उन्होंने कहा, ‘मां जानकी की प्राकट्य स्थली बिहार के सीतामढ़ी जिले के पास पुनौरा धाम में है। मैंने और जगतगुरु रामभद्राचार्य ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से आग्रह किया था कि वे पुनौरा धाम का जीर्णोद्धार वैशाली और नालंदा की तर्ज पर शुरू करें।’

देश में ‘रामायण सर्किट’ बनाने के लिए केंद्र सरकार ने मंजूरी दे दी है। जिन-जिन रास्तों से होकर भगवान राम चले थे उसे रामायण सर्किट का नाम दिया गया।

झा के मुताबिक सीतामढ़ी को देश के सबसे बड़े धार्मिक स्‍थल के रूप में विकसित किया जाएगा। बिहार सरकार ने सीता मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए 20 एकड़ जमीन दी है

बताया जा रहा है कि प्राचीन काल में शिक्षा का केंद्र रहे नालंदा और जैन धर्म के पवित्र स्‍थल वैशाली की तरह से ही सीतामढ़ी का विकास होगा। इसमें दर्शनार्थियों के लिए सुविधाओं का पूरा ध्‍यान रखा जाएगा। इससे राज्‍य में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और बड़ी संख्‍या में लोगों को रोजगार मिलेगा।

राज्‍य सरकार ने सीतामढ़ी के विकास के लिए गत 17 अप्रैल को ही 48 करोड़ 50 लाख रुपये जारी कर दिए है। सीतामढ़ी के विकास में प्रख्‍यात धर्मगुरु रामभद्राचार्य भी मदद कर रहे हैं। रामभद्राचार्य जन्‍मांध हैं लेकिन रामायण के मर्मज्ञ हैं। उन्‍होंने 100 से अधिक किताबें लिखी हैं।

बिहार में हाल ही में हुई सांप्रदायिक हिंसा से उपजे राजनीतिक टकराव के बीच इस कार्यक्रम के कई राजनीतिक अर्थ भी निकाले जा रहे हैं। घटनाओं के बाद वहां राजनीतिक स्तर पर भी टकराव होता नजर आया है। इस टकराव को बीजेपी और जेडीयू के बीच बढ़ती दूरी के रूप में देखा गया है। ऐसे में अगर जानकी मंदिर के जीर्णोंद्वार के लिए आयोजित कार्यक्रम में नीतीश कुमार का खुद मौजूद रहना बड़े राजनीतिक डिवेलपमेंट के रूप में देखा जा रहा है।

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