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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कमलनाथ के गढ छिंदवाड़ा जिले की सात सीटों पर इस बार के नतीजे चौंकाने वाले रहे, क्योंकि कांग्रेस ने बीस साल बाद यहां भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का सूपड़ा साफ करने हुए सभी सीटों पर कब्जा कर लिया। छिंडवाड़ा में 1998 के बाद इस विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के पक्ष मतदान हुआ है। नतीजे से एक अनुमान लगाया जा रहा है कि इस बार जनता ने प्रत्याशी नहीं बल्कि कमलनाथ को जिताने के लिए वोट किया है। ऐसे लगता है कि मतदाताओं ने कमलनाथ को भरपूर समर्थन देने की ठान ली थी।

इसी मानसिकता में यहां मतदाताओं ने वोट किया और नतीजा रहा कि कुल 84. 19 फीसदी मतदाताओं में 46. 29 फीसदी मतदाता कांग्रेस के पक्ष में मतदान किया। वहीं भाजपा को 36. 46 फीसदी तथा गोंडवाना गणतंत्र पार्टी (गोगपा) को मात्र 8. 49 फीसदी वोट मिले।

पिछले नौ बार से श्री कमलनाथ यहां से सांसद निर्वाचित होते आ रहे है और इस बार विधानसभा चुनावों के पहले, जब वे अप्रैल माह में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त हुए थे, तभी से जिले की जनता को अहसास हो गया था कि इस बार विधानसभा चुनावों में कमलनाथ भाजपा के लिए एक चुनौती खडी कर सकते हैं।

कमलनाथ मूलतः संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करके नये और असरकारक फार्मूले से अपनी बात जनता तक पहुंचाने और उनसे जीवंत संपर्क करने वाले नेता माने जाते है। यहीं कारण है कि छिंदवाड़ा जिले में कमलनाथ की या उनके द्वारा कहलाए गए संदेश बडी जल्दी आत्मसात कर लिए जाते हैं। यही वजह है कि छिंदवाड़ा में भाजपा के प्रचार के लिए आए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपने भाषण में 28 मिनट कमलनाथ के बारे में बोले थे।

विधानसभा चुनाव के दौरान मोदी ही नहीं बल्कि भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेद्र फडनवीस तथा केद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कमलनाथ को केंद्रित कर जो भाषण दिए, उससे कमलनाथ प्रदेश में पहुंचे बिना ही जन मानस के बीच चर्चा में आ गये। इस बात से समझा जा सकता है कि विधानसभा चुनावों के दौरान जिले के आमजन या व्यापारियों के पास प्रदेश के अन्य स्थानों से कमलनाथ के बारे में सबसे ज्यादा पूछताछ की गयी।

-साभार, ईएनसी टाईम्स

 

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