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देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) इस समय मुश्किल समय से गुजर रही है। सीबीआई अपने ही स्पेशल डायरेक्टर और जांच एजेंसी में दूसरे नंबर के शीर्ष अधिकारी राकेश अस्थाना पर तहकीकात कर रही है। यह मामला हैदराबाद के बिजनसमैन सतीश बाबू सना की शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया है। मजिस्ट्रेट कार्यालय में दर्ज एफआईआर में इस बात का दावा किया गया है कि उन्होंने सीबीआई स्पेशल डायरेक्टर को पिछले साल लगभग तीन करोड़ रुपये दिए थे।

बता दें कि अस्थाना पर आरोप है कि वह जिस मांस कारोबारी मोइन कुरैशी के खिलाफ एक मामले की जांच कर रहे थे, उससे उन्होंने रिश्वत ली। हालांकि मामला सिर्फ इतना नहीं है। यह केस सीबीआई के टॉप बॉस आलोक वर्मा और अस्थाना के बीच लड़ाई का मामला भी है

सना की शिकायत के आधार पर दर्ज एफआईआर में इस बात का दावा किया गया है कि उन्होंने सीबीआई स्पेशल डायरेक्टर को पिछले वर्ष लगभग 3 करोड़ रुपये दिए थे। सना का यह बयान सीआरपीसी की धारा 164 के अंतर्गत मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज कराया गया है जो कि कोर्ट में भी मान्य होगा।

मोइन कुरैशी से 50 लाख रुपए लेने के मामले में सना भी जांच के घेरे में था। इस मामले की जांच के लिए गठित एसआईटी का नेतृत्व राकेश अस्थाना कर रहे थे। दावा किया गया है कि पिछले वर्ष डीएसपी देवेंद्र कुमार द्वारा की गई पूछताछ में दुबई के एक इन्वेस्टमेंट बैंकर मनोज प्रसाद ने उन्हें सीबीआई से उनके अच्छे संबंधों के बारे में बताया था.

बता दें कि सीबीआई के स्पेशल डायरेक्टर और 1984 बैच के गुजरात कैडर के आईपीएस अधिकारी राकेश अस्थाना मांस कारोबारी कुरैशी की जांच की कमान संभाल रहे थे। कुरैशी पर मनी लॉन्ड्रिंग, भ्रष्टाचार समेत कई तरह के आरोप हैं।

दूसरी तरफ अस्थाना ने उन पर लगे आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए सीधे सीबीआई चीफ आलोक वर्मा पर उन्हें फंसाने का आरोप लगाया है। 15 अक्टूबर को अस्थाना ने सीवीसी को पत्र लिखकर अपनी सुरक्षा के लिए गुहार लगाई थी। वहीं सीबीआई के इस अंदरूनी विवाद पर केंद्र सरकार भी पैनी नजर रखे हुए है।

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