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देशभर से आये तीन हजार से अधिक साधु संतों ने केन्द्र एवं उत्तर प्रदेश सरकारों को आज ‘धर्मादेश’ दिया कि वह कानून अथवा अध्यादेश या किसी अन्य माध्यम से अयोध्या में श्रीरामजन्मभूमि पर भव्य राममंदिर का निर्माण का मार्ग प्रशस्त करे। अखिल भारतीय संत समिति के यहां तालकटोरा स्टेडियम में आयोजित दो दिवसीय ‘धर्मादेश संत महासम्मेलन’ के समापन अवसर पर समिति के अध्यक्ष जगद्गुरू रामानंदाचार्य हंसदेवाचार्य ने धर्मादेश पढ़ कर सुनाया। समिति के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जीतेन्द्रानंद सरस्वती ने संवाददाताओं से कहा, “राममंदिर के लिए सरकार कानून लाये या अध्यादेश, यही है संतों का धर्मादेश।”

उन्होंने कहा कि सरकार चाहे तो उच्चतम न्यायालय से अनुरोध कर सकती है कि राममंदिर को लेकर जनभावनाएं उद्वेलित हैं और कानून व्यवस्था बिगड़ सकती है इसलिए इस मामले की सुनवाई जल्द आरंभ कर दे। उन्होंने यह भी कहा कि उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश चेल्मेश्वर ने स्पष्ट कर दिया है कि अदालत में विचाराधीन मामलों पर भी सरकार अध्यादेश ला सकती है और कानून बना सकती है। उन्होंने कहा कि सरकार का काम व्यवस्थाएं एवं कानून बनाना है और न्यायालय का कार्य कानून की व्याख्या करना है। सरकार जो भी उचित समझे, उसे करें जिससे राममंदिर का मार्ग हर हाल में प्रशस्त हो।

स्वामी जीतेन्द्रानंद सरस्वती ने कहा कि लोकतंत्र में जनमत के आधार पर फैसले लिये जाते हैं। इसलिए संत देश में जनमत बनाने का काम करेंगे। जनमत बनाने के लिए इस माह 25 नवंबर को अयोध्या, नागपुर और बेंगलुरु में संतों की विशाल धर्मसभाएं आयोजित की जाएंगी तथा इसके पश्चात 500 जिलों में बड़ी बड़ी सभाएं की जाएंगी। तत्पश्चात नौ दिसंबर को नयी दिल्ली में विशाल धर्मसभा होगी जिसमें दस लाख से अधिक लोगों के आने की संभावना है। 18 दिसंबर को गीता जयंती से एक सप्ताह तक अपनी अपनी उपासना पद्धति से धार्मिक अनुष्ठान करने को भी कहा गया है। मोदी सरकार के बारे में संतो की राय सामने रखते हुए उन्होंने कहा कि कोई भी सरकार जनता के प्रति उत्तरदायी होती है। संतों का मानना है कि इस सरकार ने कई अच्छे काम किये हैं। पर राममंदिर के मामले में अगर मगर का कोई स्थान नहीं है। हम सब इसी जन्म में, इसी संसदीय कार्यकाल में मंदिर देखना चाहते हैं। शीतकालीन सत्र में गंगा के बारे में एक विधेयक आने वाला है। हमें लगता है कि गोहत्या बंदी का भी कानून आना चाहिए।

विपक्षी दलों से अपेक्षा के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि ऐसे दलों पर संतों को कोई भरोसा नहीं है जिन्होंने अपने शासनकाल में उनपर आतंकवादी होने का तमगा लगा दिया था। स्वामी असीमानंद और साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को जेल में बंद करके अत्याचार किये। उन्होंने कहा कि हकीकत यह है कि कांग्रेस के वकील राजीव धवन, कपिल सिब्बल  और विवेक तन्खा हिन्दुओं को मुंह चिढ़ाने का काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर विपक्षी दल वास्तव में गंभीर हैं तो संसद में आने वाले  एक गैरसरकारी विधेयक का समर्थन करें और राममंदिर का रास्ता साफ करें।

केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार एवं उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार के बारे में उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार उन लोगों की है जो इस देश को अपनी मातृभूमि मानते हैं और उसकी सेवा को अपना धर्म समझते हैं। संतों को विश्वास है कि मोदी और योगी की ही जोड़ी राममंदिर का निर्माण करायेगी।

धर्मादेश में भी अंत में कहा गया, “श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त न होने के कारण हम जहां आहत हैं वहीं सरकार के देश, धर्म, संस्कृति और राष्ट्रीय सुरक्षा एवं राष्ट्रीय स्वाभिमान से जुड़े अनेक कार्यों से संतुष्ट भी हैं। हमारी जो भी अपेक्षाएं हैं, वह इसी सरकार से हैं और हमारा विश्वास है कि हमारी समस्याओं का समाधान भी यही सरकार करेगी और हमारी अपेक्षाओं पर खरी उतरेगी।”

सबरीमला से जुड़े एक सवाल पर उन्होंने कहा कि श्री श्री रविशंकर ने आज के सम्मेलन में बहुत साफ तौर पर अपनी राय रखी है और संतों की भी वही राय है। उच्चतम न्यायालय ने हिन्दू महिलाओं की समानता की बात कही है। ये नहीं कहा है कि मुसलमान या ईसाई महिला रक्त से सना सैनेटरी पैड लेकर मंदिर को अपवित्र करे। न्यायालय ने पवित्र स्थानों को अपवित्र करने की इजाज़त नहीं दी है।  उन्होंने कहा कि सबरीमला पर वे उपदेश नहीं दें जिनके मज़हब में दो महिलाओं का मत एक पुरुष के मत के बराबर होता है। और वे भी नहीं दें जिनके चर्च ने अमेरिका में राष्ट्रपति के पद पर किसी रोमन कैथोलिक के ही बैठने का आदेश दे रखा है। उन्हीं लोगों ने 1975 से पहले अपनी महिलाओं को अदालतों से तक वंचित रखा था।

सम्मेलन में पारित धर्मादेश में सरकार ने गोरक्षा के लिए अलग मंत्रालय बनाने, बंगलादेश की सीमा की हाइटेक फेंसिंग करके घुसपैठ को रोकने, असम की तरह सभी राज्यों में राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर बनाने, घुसपैठ विरोधी कठोर कानून बनाने, गंगा के संरक्षण के लिए कानून बनाने, मठो एवं मंदिरों का अधिग्रहण समाप्त करके उन्हें स्वायत्तशासी बनाने, आश्रमों में पूजा अर्चना एवं धार्मिक निर्माण कार्य को धर्मार्थ मानकर उन्हें तत्संबंधी आयकर विभाग की सुविधायें एवं रियायतें प्रदान की जाएं।

                                                                       -साभार, ईएनसा टाईम्स

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