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चंदे को लेकर राजनीतिक दलों में पारदर्शिता लाने के लिहाज से केन्द्र सरकार एक बड़ा कदम उठाने जा रही है, वहीं केन्द्र सरकार के इस कदम को बहुत कदम माना जा रहा है। केन्द्र सरकार राजनीतिक दलों से मिलने वाले चंदे की प्रकिया पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए एक खास किस्म का इलेक्टोरल बॉन्ड ला रही है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने मंगलवार को लोकसभा में चुनावी बॉन्ड को अंतिम रुप देने की जानकारी दी।

अरुण जेटली ने बताया कि “जब चंदे की रकम नगदी में दी जाती है तो धन के स्रोत के बारे में कोई जानकारी नहीं मिलती। दानदाता के बारे में कोई जानकारी नहीं मिलती, कहां ये खर्च किए गए, इसकी भी कोई जानकारी नहीं मिलती। इसलिए चुनावी बॉन्ड से वर्तमान प्रणाली में पारदर्शिता आएगी।

इस व्यवस्था के आरंभ होने से देश में राजनीतिक दलों को मिलने वाले चंदे की पूरी प्रक्रिया में काफी हद तक पारदर्शिता आएगी। वित्त वर्ष 2017-18 के बजट के दौरान जेटली ने चुनावी बॉन्ड शुरू करने की घोषणा की थी। जेटली ने कहा कि हमने आम बजट के दौरान चुनावी बॉन्ड शुरू करने का ऐलान किया था।

संसद में अरूण जेटली के चुनावी बॉन्ड के विवरणों का खुलासा करने के बाद बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने कहा कि चुनावी बॉन्ड को लाना चुनाव सुधार, राजनीति में भ्रष्टाचार और काले धन पर अंकुश लगाने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित करते हैं।

इस बॉन्ड से 13 बेहद महत्वपूर्ण बातें जुड़ी है जो जानना बहुत जरूरी है।

  1.  चुनावी बॉन्ड 1 हजार, 10 हजार, 1 लाख, 10 लाख और 1 करोड़ रुपये के मूल्य में उपलब्ध होंगे।
  2.  भारतीय स्टेट बैंक की कुछ चुनिंदा बैंक शाखाओं से ही बॉन्ड खरीदा जा सकेगा।
  3.  भारतीय नागरिक या देश में काम करने वाली संस्था ही इसे खरीद सकेंगी।
  4.  बॉन्ड खरीदने के लिए केवाईसी फॉर्म यानी नो योर कस्टमर (ग्राहक को जानिए) भरना होगा।
  5.  बॉन्ड देने वाले का नाम जाहिर नहीं किया जाएगा।
  6.  बॉन्ड खरीदने वाले का नाम जाहिर नहीं होगा, लेकिन उसके बैंक खाते में इसकी जानकारी रहेगी।
  7.  चुनावी बॉन्ड की मियाद महज 15 दिन के लिए होगी, जिसे राजनीतिक दलों को दान किया जा सकेगा।
  8.  बॉन्ड्स उन्हीं राजनीतिक दलों को दिया जा सकेगा जो रिप्रजेंटेशन ऑफ द पीपुल एक्ट 1951 के धारा 29A के तहत रजिस्टर्ड होंगे।
  9.  बॉन्ड की सुविधा ऐसे राजनीतिक दलों को ही मिलेगी जिन्होंने पिछले आम चुनाव या किसी विधानसभा चुनाव में एक फीसदी से ज्यादा मत हासिल किया हो।
  10.  बॉन्ड को खरीद जाने के महज 15 दिनों के अंदर राजनीतिक दलों को केवल अधिकृत बैंक खाते के जरिए भुनाना होगा। इस बैंक खाता की जानकारी चुनाव आयोग को देनी होगी।
  11.  इसे किसी जनवरी, अप्रैल, जुलाई और अक्टूबर के महीने में 10 दिनों के अंदर खरीदा जा सकेगा।
  12. आम चुनाव वाले साल में बॉन्ड खरीदने के लिए 30 दिन अतिरिक्त मिलेगा।
  13.  हर राजनीतिक दल को चुनाव आयोग को बताना होगा कि उसे इस बॉन्ड्स के जरिए कितनी राशि मिली।
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