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एक तरफ यूपी सरकार स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के मकसद से हर रोज नई याजनाएं शुरू करने की बात करती है। वहीं, गांवों में हाल यह है कि स्कूलों में बच्चों के लिए मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं। इतनी परेशानी के बावजूद बच्चों में पढ़ने की ललक कम नहीं होती । यूपी के संतकबीरनगर जिले के मासूम बच्चे रोजाना बांस के बनी पुल के सहारे दूसरी बस्ती में पढ़ाई के लिए स्कूल जाते हैं।

स्कूल एक ऐसा स्थान है जहां बच्चें जीवन जीने और शिक्षा प्राप्त करने जाते है, फिर चाहें उनकी राह में कांटे बिछे हो या फुल, वे हर राह को आसान करते हुए अपनी डगर को पीछें छोडकर मंजिल तक पहुंच ही जाते है। ये बच्चे अपनी जान हथेली पर रखकर स्कूल जाते हैं। बच्चे जब स्कूल जाते हैं तो उनके घरवालों को भी उनकी चिंता सताती रहती है लेकिन जब इन रास्तों पर नज़र डालें तो पता लगता है कि ये खतरनाक रास्ते सही नहीं हैं। ऐसी तस्वीरों को देखकर ही रूह कांप जाती है सोचिए ये बच्चे हर रोज इसी पुल पर चढ़ कर आते जाते हैं।

दरअसल, संतकबीरनगर जिले के असनहरा गांव सेमरियावां ब्लॉक में आता है औऱ बच्चों को पढ़ाई के लिए मुंडेरवां ब्लॉक जाना होता है। नदी के इस पार बस्ती है और उसपर संतकबीरनगर आता लेकिन आजतक इस नदी पर पुल निर्माण के लिए न तो संतकबीरनगर के किसी  जनप्रतिनिधि ने ध्यान दिया और न ही बस्ती जिले के जबकी एक ज़िले से दूसरे ज़िले में जाने के लिए लोग इस खतरनाक बांस के बनाये गए पुल से सफर करते हैं ।

स्थानीय लोगों की मानें तो जन प्रतिनिधियों से कईबार इस असनहरा घाट पर पुल बनाने के लिए कहा गया है लेकिन कई सरकारें आईं और चली गईं लेकिन इसपर अभीतक पुल का निर्माण नही हो सका।

ब्यूरो रिपोर्ट, एपीएन

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