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कुछ दिनों पहले सिक्किम की सीमा को लेकर हुए भारतीय और चीनी सेना में टकराव बढ़ता जा रहा है। अब दोनों देशों के बीच तीखी बयानबाजी भी शुरू हो गई है। जहां एकतरफ भारत के सेनाध्यक्ष बिपिन रावत ने कहा था कि भारत ढाई मोर्चे पर युद्ध लड़ने के लिए तैयार है और जरूरत पड़ने पर वह चीन,पाकिस्तान और आंतरिक चुनौतियों से भी लड़ने की सामर्थ्य रखता है। भारतीय सेनाध्यक्ष के इस बयान को चीनी सेना प्रमुख ने गैर-जिम्मेदाराना करार दिया है। वहीं इसके जवाब में चीन के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि ,हमें उम्मीद है कि भारतीय सेना इतिहास से सबक लेगी।
बता दें कि सिक्किम में सीमा को लेकर कभी ऐसी स्थिति नहीं बनी थी। दरअसल चीन जिस जगह पर सड़क निर्माण करवा रहा है भारत को वहां आपत्ति है। यह जगह सिक्किम-भूटान और तिब्बत के जंक्शन प्वाइंट पर है। भारत के सामरिक हितों की बात करें तो यह क्षेत्र भारत के लिए बेहद संवेदनशील है।

वहीं चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि दोनों देशों के बीच सिक्किम विवाद तभी सुलझ सकता है जब भारतीय सेना इस क्षेत्र पर अपना हक जमाना बंद करेगी और वापस लौट जाएगी। याद दिला दें कि चीन ने भारत के दो बंकरों को ध्वस्त करके भारत के ही ऊपर सीमा उल्लघंन का आरोप लगाया था।

चीन के इस बयान को भारत किस तरह लेता है, यह देखना बाकी है लेकिन चीन का यह तेवर भारत के लिए एक नकारात्मक पहलू के रूप में देखा जा रहा है।

सिक्किम सीमा को लेकर क्यों इतना भड़का है चीन

चीन सिक्किम के पास जिस जगह पर सड़क निर्माण करवा रहा है वह सिक्किम,भूटान और तिब्बत का जंक्शन प्वाइंट है। इस क्षेत्र में तिब्बत का चुंबी घाटी सम्मलित है। चीन चुंबी घाटी में भूटान सीमा की तरफ मनमाने ढंग से अतिक्रमण करता रहता है। चुंबी घाटी तीन देशों को जोड़ने वाला एक रास्ता है। यह बेहद संकरी घाटी है। सिलीगुड़ी गलियारे से इसकी दूरी 50 किलोमीटर है। पश्चिम बंगाल में स्थित यह गलियारा भारत को उत्तरपूर्वी राज्यों से जोड़ता है। चुंबी घाटी सिर्फ सीमा के ही लिहाज से नहीं अपितु आतंरिक सुरक्षा के लिहाज से भी भारत के लिए काफी महत्वपूर्ण है। चीन की यहां तक पहुंच भारत के लिए काफी हानिकारक है।

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