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मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के भीतर चल रहे संघर्ष पर टिप्पणी करते हुए कहा है कि इन घटनाओं से पता चलता है कि केंद्र की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक सरकार ने संवैधानिक संस्थाओं की छवि कितनी ख़राब की है और इससे सरकार की नीयत भी उजागर होती है।

माकपा पोलित ब्यूरो ने मंगलवार को यहां जारी विज्ञप्ति में कहा है कि चाहे संसद की अनदेखी हो या न्यायपालिका में हस्तक्षेप या सीबीआई के दुरुपयोग का मामला हो, ये सब मात्र खराब शासन का ही मामला नहीं बल्कि सरकार की बुरी नीयत का भी परिचायक है। ऐसी घटनाओं से पता चलता है कि मोदी सरकार किस तरह देश की लोकतान्त्रिक धर्मनिरपेक्ष बुनियाद को ध्वस्त करना चाहती है।

पार्टी का मानना है कि यह सब घटनाएं भारतीय गणतंत्र को गंभीर तरीके से चोट पहुंचा रही हैं, इसलिए इसका विरोध किया जाना चाहिए। पार्टी ने कहा कि भाजपा और संघ परिवार को देश के संवैधानिक ढांचे को नुकसान पहुंचाने से हर हालत में रोका जाना चाहिए।

गौरतलब है कि सीबीआई के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना और निदेशक अनिल वर्मा ने एक-दूसरे पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाये हैं और अस्थाना के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करायी गयी है। राकेश अस्थाना ने आज उच्च न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाया है।

-साभार,ईएनसी टाईम्स

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