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लोकसभा चुनाव 2019 में हार के बाद दिल्ली कांग्रेस में फुट पड़ती नजर आ रही है। दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष शीला दीक्षित को हटाने की मांग तेज हो गई है। वहीं दिल्ली प्रदेश कांग्रेस प्रभारी पीसी चाको को साइडलाइन किए जाने की मांग ने भी जोर पकड़ लिया है। इस घटनाक्रम से चिंतित पार्टी की केंद्रीय इकाई कई वरिष्ठ नेताओं के पास पहुंच राज्य के मौजूदा नेतृत्व पर गंभीरता से विचार कर रही है।

दिल्ली में कांग्रेस पार्टी दो गुटों में बंटी नजर आ रही है एकतरफ पीसी चाको का गुट है तो दूसरी तरफ शीला दीक्षित का गुट। पार्टी के सीनियर नेता के अनुसार ‘आगामी विधानसभा चुनावों के लिए पार्टी की भविष्य की रणनीति पर चर्चा शुरू हो गई है। हाल के लोकसभा चुनावों में पार्टी का प्रदर्शन और दिल्ली में कांग्रेस की कमान संभालने वाले नेताओं के प्रदर्शन को ध्यान में रखकर फैसला लिया जाएगा।’

एक अन्य नेता ने कहा ‘दीक्षित ने बुधवार को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से मुलाकात की। हमने सुना है कि पार्टी अध्यक्ष कुछ बदलाव कर सकते हैं। चाको को पद से हटाया जा सकता है क्योंकि हमने उनके कार्यकाल में कई चुनाव हारे हैं।’ वहीं शीला दीक्षित ने कहा है कि ‘हां ये सच है कि इन मुद्दों पर पार्टी के भीतर बातें हो रही हैं लेकिन जबतक कोई फैसला नहीं लिया जाता मैं तब तक कुछ नहीं बोलूंगी।’ बता दें कि लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी दिल्ली में दूसरे नंबर पर रही जो कि 2014 की तुलना में बेहरत प्रदर्शन है।

सोमवार को राहुल गांधी को लिखे एक पत्र में दिल्ली महानगर परिषद के पूर्व अध्यक्ष पुरुषोत्तम गोयल ने दीक्षित को हटाने के लिए कहा और सुझाव दिया कि पार्टी अगले साल विधानसभा चुनाव में ‘नए चेहरे’ के साथ चुनाव लड़े। यह काउंसिल अब अस्तित्व में नहीं है। दूसरी ओर, कांग्रेस के एक अन्य नेता रोहित मनचंदा ने चुनाव हारने के कारण चाको के इस्तीफे की मांग की थी। दीक्षित ने कहा, ‘ठीक है। यह उनकी राय है।

बता दें कि लोकसभा चुनाव से पहले दिल्ली में आम आदमी पार्टी के साथ गठबंधन को लेकर दीक्षित और चाको में गंभीर मतभेद थे। दीक्षित गठबंधन के खिलाफ थीं तो चाको चाहते थे कि गठजोड़ हो जाए। आखिरकार दोनों पार्टियों ने अलग अलग चुनाव लड़ा।

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